Friday, December 16, 2011

भक्ति के 9 प्रकार - नवधा भक्ति

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BY MR NEERAJ MITTAL- FROM FACEBOOK 


प्राचीन शास्त्रों में भक्ति के 9 प्रकार बताए गए हैं जिसे नवधा भक्ति कहते हैं।

श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम् ।
अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥

श्रवण (परीक्षित), कीर्तन (शुकदेव), स्मरण (प्रह्लाद), पादसेवन (लक्ष्मी), अर्चन (पृथुराजा), वंदन (अक्रूर), 



दास्य (हनुमान), सख्य (अर्जुन), और आत्मनिवेदन (बलि राजा) - इन्हें नवधा भक्ति कहते हैं ।

श्रवण: ईश्वर की लीला, कथा, महत्व, शक्ति, स्त्रोत इत्यादि को परम श्रद्धा सहित अतृप्त मन से निरंतर सुनना।

कीर्तन: ईश्वर के गुण, चरित्र, नाम, पराक्रम आदि का आनंद एवं उत्साह के साथ कीर्तन करना।

स्मरण: निरंतर अनन्य भाव से परमेश्वर का स्मरण करना, उनके महात्म्य और शक्ति का स्मरण कर उस 


पर मुग्ध होना।

पाद सेवन: ईश्वर के चरणों का आश्रय लेना और उन्हीं को अपना सर्वस्य समझना।

अर्चन: मन, वचन और कर्म द्वारा पवित्र सामग्री से ईश्वर के चरणों का पूजन करना।

वंदन: भगवान की मूर्ति को अथवा भगवान के अंश रूप में व्याप्त भक्तजन, आचार्य, ब्राह्मण, गुरूजन, माता-



पिता आदि को परम आदर सत्कार के साथ पवित्र भाव से नमस्कार करना या उनकी सेवा करना।

दास्य: ईश्वर को स्वामी और अपने को दास समझकर परम श्रद्धा के साथ सेवा करना।

सख्य: ईश्वर को ही अपना परम मित्र समझकर अपना सर्वस्व उसे समर्पण कर देना तथा सच्चे भाव से 


अपने पाप पुण्य का निवेदन करना।







आत्म निवेदन: अपने आपको भगवान के चरणों में सदा के लिए समर्पण कर देना और कुछ भी अपनी 


स्वतंत्र सत्ता न रखना। यह भक्ति की सबसे उत्तम अवस्था मानी गई 





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BY ASTRO VIND GOEL- VASTU TIPS


बाँसुरी की जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका.. 

बाँसुरी को शान्ति, शुभता एवं स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. यह उन्नति, प्रगति एवं 

सकारात्मक गुणों की वृद्धि की सूचक भी होती है. बाँसुरी का निर्माण बाँस के ताने से होता है. सभी 

वनस्पतियों में बाँस सबसे तेज गति से बढ़ने वाला पौधा होता है.इसी कारण से यह विकास का 

प्रतीक है.और किसी भी वातावरण में यह अपना अस्तित्व बनाए रखने की क्षमता इसमें होती है. 

अशुभ निर्माण संबंधी वास्तु दोषों में बाँसुरी का प्रयोग होता है. ग्रह दोषों के अंतर्गत शनि, राहू आदि 

पाप ग्रहों से सम्बन्धित दोषों के निवारण में बाँसुरी का कोई विपरीत प्रभाव नहीं होता है. लेकिन 

बाँसुरी के प्रयोग में एक सावधानी अवश्य रखनी चाहिए वह यह है कि, जहां कहीं भी इसे लगाया 

जाए, वहां इसे बिलकुल सीधा नहीं लगा कर थोड़ा तिरछा लगाना चाहिए तथा इसका मुंह नीचे की 

तरफ होना चाहिए.

घर की शान्ति -शंख और घंटी तथा बाँसुरी 

भारत में ध्वनि द्वारा घर तथा वातावरण को शुद्ध करने की परम्परा कई सदियों से चली आ रही है. 

शंख के बारे में शोध किया गया और यह निष्कर्ष निकला कि शंख की आवाज से आसपास के सूक्ष्म 

कीटाणुओं में भारी कमी आ जाती है, इसी प्रकार घंटी व घंटे की आवाज से कुछ अदृश्य बुरी शक्तियां 

दूर होती है. चीन में इस सिंगिंग बाउल का प्रयोग परिवार के सदस्यों के बीच आपसी लगाव में 

सुधार लाने के लिए भी किया जाता है. इसकी ध्वनि येंग व यिन ऊर्जा में संतुलन लाती है.यदि 

आपको लगता है या महसूस हो रहा है कि घर-परिवार में कुछ अशांति हो रही है, तो इसका 

नियमित प्रयोग करने से घर की ऊर्जा शुद्ध हो जायेगी. चीन या फेंगशुई में इस ऊर्जा को ची कहा 

जाता है.

घर में छुपी ये चीजें - रोक देती है पैसा 

- अगर आपके घर में बहुत दिनों से बंद घड़ी है तो उसे हटा दें बंद घड़ी घर में आते हुए पैसों को रोक 

देती है।

- आपके घर में टूटी हुई चेयर या टेबल पड़ी है तो उसे तुरंत घर से हटा दें। ये आपके पैसों और 

तरक्की को रोक देती है।

- पुराने या टूटे हुए जूते-चप्पल आपको आगे बढऩे से रोक देते हैं। इन्हे घर से निकाल दें।

- पूजा में चढ़े हुए और मुरझाए हुए फूल घर में नहीं रखें इनसे अशुभ फल मिलता है।

- घर में बनने वाले मकड़ी के जाले तुरंत हटा दें इनसे आपके अच्छे दिन बुरे दिनों में बदल सकते 

हैं।

फैक्टरी की मशीनें बार-बार खराब -उपाय

काली हल्दी को पीसकर केसर तथा गंगाजल मिलाकर शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को मशीनों पर 

स्वस्तिक का चिह्न बना दें। यह करने से आपकी फैक्टरी की मशीनें खराब नहीं होंगी।

एक वस्तु - कौडिय़ां- समस्या का समाधान-

यह समुद्र से निकलती हैं और सजावट के काम भी आती हैं। तंत्र शास्त्र के अंतर्गत धन प्राप्ति के लिए 

किए जाने वाले अनेक टोटकों में इसका प्रयोग किया जाता है। कौडिय़ों के कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-

1- यदि प्रमोशन नहीं हो रहा है तो 11 कौडिय़ां लेकर किसी लक्ष्मी मंदिर में अर्पित कर दें। आपके 

प्रमोशन का रास्ते खुल जाएंगे।

2- यदि दुकान में बरकत नहीं हो रही है तो दुकान के गल्ले में 7 कौडिय़ां रखें और सुबह-शाम 

इनकी पूजा करें। निश्चित ही बरकत होने लगेगी।

3- यदि आप नया घर बनवा रहे हैं तो उसकी नींव में 21 कौडिय़ां डाल दें। ऐसा करने से आपके घर 

में कभी पैसों की कमी नहीं रहेगी और घर में सुख-शांति भी बनी रहेगी।

4- अगर आपने नया वाहन खरीदा है तो उस पर 7 कौडिय़ां एक काले धागे में पिरोकर बांध दें। 

इससे वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना कम हो जाएगी।

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