Wednesday, January 26, 2011

Vastu in your Office

अपने कार्य स्थल का वास्तु कैसा हो ?

  • आपका केबिन इस तरह हो कि कुर्सी पर बैठते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर कि तरफ़ हो.
  • आपको केबिन मै क्लॉक वाइस घूमकर बैठना चाहिए.
  • आपकी कुर्सी के पीछे दीवार होना चाहिये ना कि खिड़की.यदि खिड़की है तो उसे बंद रखना उचित रहेगा.
  • आपके ऑफिस मै हवा आने के लिए खुला खुला वातावरण होना चाहिए तथा किसी भी प्रकार कि बदबू नही आना चाहिए.
  • अपने ऑफिस मै जहा तक संभव हो व्यवहार में विनम्रता रखे और हँसते रहे.क्रोध आपको विचलित रखेगा और माहौल में नकारात्मकता फैलेगी.
  • ऑफिस में टेबल पर सामान सुविधाजनक रुप से रखा होना चाहिए तथा आवशक्ततानुसार लाइट का अच्छा प्रबंध होना चाहिए.
  • केबिन का दरवाजा आपकी तबालई के एकदम  सामने ना होकर right या left में होना उचित रहता है.
  • मशीन आदि इलेक्ट्रॉनिक या मेकेनिकल items दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना उचित रहता है.
  • ऑफिस में कबूतर के घर होना या मधुमक्खी के छत्ते होना अशुभ माना गया है.
  • यदि आप ऑफिस में मायूस रहते है या आपके अपने बॉस से अनबन रहती है तो केबिन में अगरबर्त्ती  का प्रयोग करने से लाभ मिलता है.
  • ऑफिस में हमेशा जूते  पहन कर जाना चाहिये,चप्पल पहनने से नकारात्मक ऊर्जा आती है.
  • ऑफिस जाने से पहले अपने इष्ट देवता कि पूजा करना,माता पिता का आशीर्वाद लेना हमेशा शुभ रहता है.
  • यदि अशुभ समय चल रहा हो तो घर पर पूजा करते समय लौंग से हवन करके अपने मालिक की सुख व शांति हेतु प्रार्थना करने से लाभ मिलता है. 
  • टेबल के drawers या अल्मारी आदि में अनावश्यक सामान भरना,या अव्यवस्थित ऑफिस होना अशुभ माना गया है.
Article by Ashutosh Joshi (Vastu Consultant)

Tuesday, January 25, 2011

WEB SITE VASTU


वेबसाइट के फ्रंट पेज का हिस्सा उत्तर, निचला  दक्षिण, दाई
ओर पूर्व तथा बाई ओर पश्चिम माना जाता है।


वेबसाइट के 'फ्रंट पेज' की तुलना भवन के मुखय द्वार या साइन बोर्ड से की जाती है। अतः यह इतना दमदार होना चाहिए कि लोग इसे अवश्य देखें। वेबसाइट के 'ले-आउट' का संबंध भूमि तत्व से है। अतः फ्रंट पेज आयताकार होना चाहिए तथा इसकी लंबाई, चौडाई के दोगुने से अधिक नहीं होना चाहिए। वेबसाइट की विषयवस्तु का संबंध जल तत्व से तथा उसके रंगा  का संबंध अग्नि तत्व से होता है। अतः विषयवस्तु प्रवाह में होना चाहिए। 'यूआरएल' या 'डोमेन नेम' का संबंध आकाश तत्व से तथा वेब डिजाइन में प्रयुक्त होने वाली तकनीकों जैसे -'एचटीएमएल' या 'एएसपी' का संबंध वायु तत्व से है। वेबसाइट के फ्रंट पेज का ऊपरी हिस्सा उत्तर, निचला दक्षिण दाई ओर पूर्व तथा बाई ओर पश्चिम माना जाता है। इसके उत्तर - पूर्वी कोने पर हलकी - फुलकी सामग्री डालें तथा इसे ऊर्जावान करने के लिए छोटे 'एनीमेशंस' का उपयोग करें। फ्रंट पेज के दक्षिण - पश्चिम कोने को भारी रखें। 


इसके लिए बडे व स्थिर चित्रों का प्रयोग किया जा सकता है। दक्षिण - पूर्वी कोने में चटक रंगो का प्रयोग करें व कंपनी का 'लोगो' उत्तर -  पश्चिम  कोने में लगाएं। 'लोगो' की आकृति व रंग व्यवसाय के अनुरुप होना चाहिए। उत्तर में विज्ञापनों के 'एनीमेशंस' व दक्षिण में कंपनी का नाम, पता आदि डालें।  पश्चिम  में विभिन्न पेजों के लिंक व पूर्व में छोटे विज्ञापन लगाएं। केंन्द्रीय भाग में हलकी पाठ्‌य वस्तु या छोटे - छोटे 'एनीमेशंस' का प्रयोग करें। वेबसाइट का निर्माण करते वक्त यह ध्यान रखें कि कोई नुकीली डिजाइन, कंपनी के नाम आदि को निशाना न बना रहा हो। 


अलग - अलग व्यवसायों के लिए वेबसाइट बनाते वक्त कंपनी के 'लोगो' के आकार व विषयवस्तु के रंगों का चुनाव वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुरुप ही करें। भवन निमार्ण, रीयल इस्टेट, आर्किटेक्चर आदि के लिए पीले, भूरे व लाल रंगो का प्रयोग करें। इनका 'लोगो' वर्गाकार या त्रिभुजाकार रखें। बैकिंग, बीमा, ट्रेडिंग,    शा  पिंग, पर्यटन आदि के लिये काले व नीले रंगो का प्रयोग करें। रेस्टोरेंट, होटल व अग्नि आदि के लिये लाल, पर्पल व हरे रंगो का प्रयोग करें। इनका 'लोगो' त्रिभुजाकार या आयताकार रखें।

आटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रानिक्स, छापखाना (प्रेस) मद्गाीन, ज्वैलरी, खदान आदि वेबसाईटो के लिए सुनहरे व पीले रंगों का प्रयोग करें। इनका 'लोगो' गोल या वर्गाकार रखे। प्रिटिंग, मीडिया, फर्नीचर, बागवानी, डेयरी आदि से जुडें वेबसाइटों के लिए हरे, नीले व काले रंगो का प्रयोग करे। इनका 'लोगो' आयताकार या तरंगाकार रखे। वेबसाइट के आरंभ में हल्के व आकर्षण तथा निचले हिस्से में गंभीर विषयवस्तु डाले।

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Importance & Procedure for donating spiritual items


दान का महत्व एवं विधि

शास्त्रों में गृह शांति के विभिन्न उपायों में गृहानुसार दान देने का विशेष  महत्व है किन्तु ऐसा देखने में आया हैं कि लोग दान के महत्व व विधि से पूर्णतः अवगत नहीं है। इसलिये दान देने के बावजूद भी दान का सुफल दानदाता को नहीं मिल पाता है।

दान देने की सही विधि व सही कारण दान के पुण्य को दुगुना कर देता है। दान का सुफल उतना ही लौटकर आ जाता  है, जैसे :- कुएं में झाककर आवाज देने से हमारे स्वर पुनः लौट आते है। दान का सुफल किसी भी रुप में निश्चित मिलता ही है। किन्तु हम यह जान नहीं पाते कि किस दान का क्या सुफल हमें मिला। दान के पुण्य का न तो कोई निश्चित समय होता है और न ही कोई निश्चित मात्रा।


१. दान देने से पूर्व यह जरुर मालूम होना चाहिये कि दान  किसे, कब और क्यों देना है, अर्थात दान हमेशा    किसी जरुरतमंद को, किसी उपयुक्त दिन व समय में देना शुभ माना गया है।
२. शास्त्रों में विभिन्न ग्रहों की शांति के लिये विभिन्न उपाय बताये गये है। विभिन्न ग्रहो के अनुसार दान भी अलग - अलग है। अतः ग्रहों के उपयुक्त दिन, रंग व वस्तु को ध्यान में रखकर दान देना चाहिए।
. सूर्य ग्रह की शांति के लिये आटे, गुड तथा तांबे का दान करना चाहिए।रत्नों में माणिक भी दान कर सकते है।
. चंद्र ग्रह की शांति हेतु चांदी, दूध, चांवल, सफेद कपडे, सफेद मिठाई, आदि का दान करना चाहिए। शंख, कपूर, श्वेत चंदन और मोती का दान भी उपयुक्त है।
५. मंगल ग्रह की शांति के लिये लाल कपडा, मूंगा, मसूर की दाल, गुड, सिन्दूर, व लाल मिर्ची का दान उपयुक्त माना गया है।
. बुध ग्रह की शांति के लिये हरे कपडे, हरा धनिया, पन्ना, साबूत मूंग की दाल, हरी सब्जी, कांस्य के बर्तन, घी, मिश्री, आदि का दान उपयुक्त है।
७. बृहस्पति ग्रह की शांति हेतु पीले वस्त्र, चने की दाल, सोना, पुखराज, पीले फूल, केसर, पीले फल, हल्दी, शहद, भूमि आदि का दान उपयुक्त है।

८. शुक्र ग्रह की शांति के लिये चांदी, दूध, चांवल, सफेद कपडे, सफेद मिठाई, आदि का दान करना चाहिए। शंख, कपूर, श्वेत चंदन और अमेरिकन डायमंड का दान भी उपयुक्त है।
९. शनि ग्रह की शांति हेतु काले वस्त्र, काला छाता, काला कम्बल, काला नमक, उदड की दाल, लोहा, नेत्र रोग की दवाईयां, नीलम, या तुरमुली, काला तिल, चमडा, सरसों का तेल, शराब, आदि का दान उचित माना गया है।
१०. राहु ग्रह की शांति के लिये जौ, गोमेद, उडद, सोने का साप, सात प्रकार के अन्न, नीला वस्त्र, काले फूल, काले तिल, तांबे का बर्तन आदि का दान करना उपयुक्त माना गया है।
११. केतु ग्रह की शांति हेतु उडद, कम्बल, कस्तूरी, लहसुनिया, काले फूल, काले तिल, लोहा, सोना व सात प्रकार के अन्न दान करना उपयुक्त माना गया है।

दान करने के उपरांत दान के बारे में किसी अन्य व्यक्ति से चर्चा करने से दान का महत्व खत्म हो जाता है। अतः जब हम निःस्वार्थ भाव से, शुद्ध मन से, शुद्ध भावना से बिना विचलित हुये एवं विनम्रता से दान करते है तभी पुण्य कमा सकते है।
Don't forget that we are ultimately judged by "what we give" and not by "what we get".
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Thursday, January 13, 2011

More about The SUN


  1. The Solar System comprises the sun together with all the planets and other bodies directly or indirectly revolving round it.
  2. Solar system as we call it here SS includes nine planets along with the satellites that travel around the planets.
  3. SS is 33,000 light year from the  centre of the Galaxy.
  4. The revolution of  the SS around the centre of the Milky way is called Cosmic year.
  5. The SUN is one among the 100 billion stars in the giant spiral Galaxy,called the Milky way.
  6. The SUN is a shining spherical heavenly body around which the planets rotate.
  7. The glowing surface of the SUN which we see is called photosphere.Above this is the chromosphere.Beyond Chromosphere is the magnificent corona of the SUN which is visible during eclipses.
  8. At the Core of the SUN the temperature is around 15 million degrees k.
  9. The weight of the SUN is 33 lakh times heavier than the Earth's weight.
  10. Diameter of the SUN is 1384000 km.
  11. Rotation on its axis (at the Equator) 25.38 days.
  12. Rotation on its axis (near the poles) 33 days.
Compiled by -  Ashutosh Joshi
Reference book-21st Century-Student's Companion - By Vijaya Kumar

Monday, January 10, 2011

Pearl - (Moti) Precious stone for MOON


मोती 
हिन्दी नाम                  मोती
  उपयुक्त ग्रह                   चन्द्रमा

   उपयुक्त दिन                  सोमवार
          उपयुक्त अंगुली                तर्जनी कनिष्का
उपयुक्त रंग                   सफेद
उपयुक्त धातु                  चांदी
        उपयुक्त वजन                 सवा पॉच रत्ती
          उपयुक्त मंत्र                   ऊं चंद्राय नमः
                                        ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः

उपयुक्त अपेक्षित लाभ

1    मानसिक शांति मिलती है।
2.   अस्थिरता उत्तेजना उलझन दूर होती है।
3.   तन व मन शीतल रहता है।
4    क्रोध शांत होता है।
5    उत्साह व धन बढाता है।
6    तेज व ओज बढाता हैं।
7    मोती पहनने से विपरित असर नहीं होता है।
8    स्त्रियों की पेट की बीमारी में लाभ होता है।
9    मोती की भस्म हदय रोग में लाभ पहुचाती है।
10   इस रत्न से चन्द्रमा ग्रह संबंधित सारे दोष दूर होते है।
11   12 घंटे मोती को चांदी के पात्र में रखकर उसका जल ग्रहण करने से मियादी बुखार उतरते है। मूत्र संबंधी रोग में लाभ होता है।

मुख्य रुप से अधिक चमक व आभा वाला मोती ही उत्तम होता है। आचार्य वाराहमिहिर के अनुसार मोती की उत्पति हाथी] सर्प] सीपी] शंख]मेघ]बांस]मछली और सुअर से बताई है]किन्तु शास्त्रों के अनुसार सीप से उत्पन्न मोती ही श्रेष्ठ माना गया है।


यदि चन्द्र ग्रह कमजोर स्थिति में हो तो निम्नलिखित उपाय करे

चंद्रमा को अपने अुनकूल करने के लिए रात को सिरहाने दूध या पानी लोटे में भरकर रख ले एवं सुबह उठकर कीकर के वृक्ष में डाल दे। मोती z चावल z दूध तथा चांदी का दान कर सकते है।

जब जन्म या वर्ष कुंडली में चंद्र ग्रह अशुभ हो तो निम्नलिखित मंत्र को 11 हजार की संख्या मंे जप करना और तदुपरांत दशमांश संख्या में हवन करना कल्याणकारी होता है। जल का आरंभ पूर्णिमा या शुक्ल पक्ष के सोमवार से करना चाहिए ।

तंत्रोंक्त चंद्र मंत्र: ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः

दान योग्य वस्तु;s +चांवल , सफेद z चंदन z शंख z कपूर z घीz z दही z चीनी z मिश्री z मोती z श्वेत वस्त्र z श्वेत पुुष्प z श्वेत फल z चांदी z मिठाई और दक्षिणा।

अन्य उपाय:
1.   चांदी के बर्तनों का प्रयोग करना एवं चारपाई के (सोने योग्य दीवान इत्यादि भी ) पायों में चांदी के कील ठुकवाना।
2    सफेद मोतियों की माला अथवा चांदी की अंगूठी में मोती धारण करना।
3    शीशे के गिलास में दूध , पानी आदि पीने से परहेज रखना तथा चंादी के बर्तनों में दूध , पानी शुभ होगा।
4    पानी मंें कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा की बीज मंत्र  पढते हुए पीपल पर डालना।
5   लगातार 16 सोमवार व्रत रखकर सायंकाल सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिये तथा पांच छोटी कन्याओं को क्षीर सहित भोजन कराना चाहिये।
6    सोमवार को ही प्रातः काल स्नानादि करके ताम्र बर्तन में कच्ची लस्सी (जल तथा थोडा सा दूध) भगवान की मूर्ति शिवलिंग पर चढाना चाहिये।
7    चांदी का कडा , चेन या सिक्का धारण करना चाहिये।

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