Saturday, March 15, 2014

होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय​ :

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आलेख - पं. कंदर्प आचार्य


गुरुकृपा, जैन मंदीर के पास,
मु.पो.- लिमडी, ता- झालोद, जि- दाहोद.
पिन कोड- 389180 ( गुजरात )  
मो: 09724452512, 09724452616


 हमारे प्राचीन मनीषियों ने फाल्गुन पूर्णिमा को विशेष महत्त्व देते हुए उस दिन गेहूं, जौ आदि की बालियां होलिका में भून कर नवान्नेष्टि करने का निर्देश दिया है और एक-दूसरे को मिष्टान सहित बांट कर खाने-खिलाने को लाभप्रद बताया है। पूजा-पाठ व साधना की दृष्टि से भी होली की रात्रि को अति महत्त्वपूर्ण बताया गया है जिसमें संकल्प लेकर किए जाने वाले उपायों का लाभ अवश्य प्राप्त होता है। द्वादश राशि के जातक-जातिकाएं होली के दिन क्या उपाय करें कि उनके घर में खुशहाली आए, कारोबार में वृध्दि हो, धन लाभ हो और आस पास का सम्पूर्ण वातावरण मंगलमय हो।
* होली पर्व पर राशि अनुसार विशेष उपाय​ :
* मेष राशि :
1. इस राशि के जातक-जातिकाओं को किसी भी प्रकार की कारोबारी, पारिवारिक या स्वास्थ्य सम्बंधी परेशानी हो या इसका हमेशा भय बना रहता है, मेहनत का उचित फल नहीं मिलता हो। तो होलिका दहन के समय एक तांबे की कटोरी में चमेली का तेल, पांच लौंग और आंवले के पेड़ के पांच पत्ते, थोड़ा सा गुड़। यह सभी समान कटोरी में रख दें। मंगल गायत्री का 108 बार जाप करते हुए समस्त सामग्री को होलिका दहन के समय होलिका में अर्पित कर देना चाहिए। प्रात: काल सुबह होली की थोड़ी सी राख लेकर आएं और उस राख को चमेली के तेल में मिला कर अपने शरीर पर मालिश करें। किसी भी तरह की समस्या होगी उसका निवारण होगा। एक घंटे बाद हल्के गरम पानी से स्नान कर लें।
2. दूसरे दिन ब्रह्ममुर्हूत्त में जहाँ होली जली थी वहाँ की सात चुटकी राख, सात तांबे के छेद वाले सिक्के, लाल कपड़े में बांधकर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर टांग दें या इस सामग्री को अपनी तिजोरी में रख दें। धन लाभ अवश्य होगा।
* वृष राशि:
1. इस राशि के जातक-जातिकाओं को यदि व्यापारिक समस्या हो, घर में सुख शांति न हो, लेन-देन के मसलों से परेशानी हो, स्वास्थ्य अनुकूल न रहता हो, कारोबार से लाभ न मिल रहा हो तो चाँदी की कटोरी ले लें और उसमें थोड़ा सा दूध, पांच चुटकी चावल डाल दें, गुलमोहर के पांच पत्ते डाल दें। थोड़ा पांच चुटकी शक्कर, इन सारे सामानों को होलिका दहन के समय शिव गायत्री का 108 बार जाप करके अग्नि को समर्पित कर दें। कैसी भी व्यापारिक समस्या होगी उसका निवारण हो जाएगा।
2. होली के प्रात:काल सफेद कपड़े में 11 चुटकी होलिका दहन की राख और एक सिक्का चाँदी का बांध लें। इस सामग्री को अपनी तिजोरी में रख दें। कारोबारी सारी समस्याओं का निवारण होगा।
* मिथुन राशि:
1. अनावश्यक कलह, व्यापार में घाटा, अपनों का विरोध, मानसिक अस्थिरता, इन सारी समस्याओं के निवारण के लिए होलिका दहन के समय कांसे की कटोरी में 50 ग्राम हरे धनिया का रस, 108 दाने साबूत मूंग के, पीपल के पांच पत्ते, कोई भी हरे रंग की मिठाई – इन सारी सामग्रियों को अपने हाथ में रख कर ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे का 108 बार जाप करके इस सामग्री को होलिका दहन के समय अग्नि को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. हरे कपड़े में 3 चुटकी होलिका दहन की राख, 3 हरे हकीक के पत्थर बांधकर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर बांध लें या इस सामग्री को तिजोरी में रख दें। कारोबारी समस्या का निवारण अवश्य होगा।
* कर्क राशि :
1. मानसिक अस्थिरता रहे, काम में रुचि नहीं रहे, अपनों से धोखा मिला करे, काम बदलने की प्रवृत्ति बढ़े, तो ऐसी अवस्था में सभी समस्याओं के समाधान के लिए एक कटोरी ले लें और उसमें थोड़ा सा दही रख लें, फिर उसमें पांच चुटकी चावल भी डाल लें, अशोक के सात पत्ते और सफेद पेठा की मिठाई ले लें। इन सबको कटोरी में रख कर अपने हाथ में रख लें। महामृत्युंजय का 108 बार जाप करके अग्नि को समर्पित कर दें। इससे सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. प्रात:काल सफेद कपड़े में होलिका दहन की राख 7 चुटकी, 7 गोमती चक्र बांधकर दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान या घर के मुख्य द्वार पर लटका दें अथवा अपनी तिजोरी में रख दें। महालक्ष्मी की कृपा अवश्य होगी।
* सिंह राशि:
1. यदि कारोबार में सफलता नहीं मिल रही हो, स्वास्थ्य अनुकूल नहीं हो, कार्यों में अप्रत्याशित बाधा आ रही हो तो होलिका दहन के दिन कांसे की कटोरी में थोड़ा सा घी ले लें, पांच चुटकी गेहूं, पांच चुटकी देसी खाण्ड, अशोक वृक्ष के पांच पत्ते, कटोरी में रखकर अपने हाथ में ले लें और सूर्य गायत्री का 108 बार जाप करके समस्त सामग्री को होलिका को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
2. सुनहरे कपड़े में 5 चुटकी होलिका दहन की राख, तांबे के पत्र पर खुदा हुआ सूर्य यंत्र, पांच तांबे के पुराने सिक्के बांधकर जहाँ धन रखते हैं, यदि वहाँ रख दिया जाए तो व्यावसायिक प्रतिकूलताओं का शमन होगा। एक बात का ध्यान अवश्य रखें, सूर्य यंत्र को खोल कर घी का दिया व धूप अवश्य दिखाएं।
* कन्या राशि:
1. किसी काम में स्थिरता नहीं बनती हो, दिए हुए पैसे वापस नहीं मिल रहे हों, अपनों की वजह से हमेशा परेशानी झेलनी पड़ रही हो या कारोबारी या कानूनी समस्या हो तो ताम्बे की कटोरी में आंवले का थोड़ा सा तेल ले लें और पांच पत्ते नीम, पांच इलायची, नारियल से बनी मिठाई, इन सारी सामग्री को कटोरी में डाल कर अपने हाथ में रख लें और 108 बार बुध के बीज मंत्र का जाप करते हुए सारी सामग्री को हालिका में दहन कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. हरे कपड़े में 11 चुटकी होलिका दहन की राख, 11 बलास्त (बीता) हरा धागा, छेद वाले तांबे के सात सिक्के बांध कर दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान आदि के मुख्य द्वार पर टांग दें या अपने तिजोरी में रखने से कारोबार में वृध्दि होगी और सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
* तुला राशि:
1. यदि व्यापारिक, शारीरिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा हो अथवा अनावश्यक कार्य बाधा आ रही हो तो इन्हें चाँदी की कटोरी में पांच छोटी चम्मच गाय के दूध की खीर ले लें, पांच पत्ते शीशम के, गेंदा के पांच फूल, इन सारी सामग्रियों को अपने हाथ में रख कर शिव षडाक्षरी मंत्र यानी ॐ नम: शिवाय का 108 बार जाप करके होलिका दहन के समय यह समस्त सामग्री अग्नि को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. क्रीम रंग के कपड़े में 7 चुटकी होलिका दहन की राख, 7 कोड़ियां पीली धारी वाली बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। अवश्य लाभ होगा।
* वृश्चिक राशि:
1. इस राशि के जातक-जातिका यदि कार्य सफलता के लिए जूझना पड़ रहा हो और तब भी कार्य सफलता न मिल रही हो, कारोबार में लाभ न मिल रहा हो तो इन्हें तांबे की कटोरी में चमेली का तेल डाल कर, पांच साबूत लाल मिर्च, एक बुंदी का लड्डू, पांच गूलर के पत्ते, इन समस्त सामग्री को अपने हाथ में रखकर ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा का 108 बार जाप करके सारी सामग्री अग्नि को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. लाल कपड़े में 17 चुटकी होलिका दहन की राख, 1 लाल मूंगा बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। कारोबार सम्बंधित सारी समस्या का निवारण होगा।
* धनु राशि:
1. यदि व्यापारिक, शारीरिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा हो अथवा अनावश्यक कार्य बाधा आ रही हो तो इन्हें एक पीतल की कटोरी में देसी गाय का थोड़ा सा घी, थोड़ा सा गुड़, पांच चुटकी चने की दाल, पांच आम के पत्ते डाल अपने हाथ में रख लें फिर बृहस्पति गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करके इन समस्त सामग्रियों को होलिका दहन के समय अग्नि को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. पीले कपड़े में 9 चुटकी होलिका दहन की राख एवं 11 पीली कोड़ियां बांधकर अपनी तिजोरी में रख लें। कारोबार सम्बंधी कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा।
* मकर राशि:
1. यदि व्यापारिक, शारीरिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा हो, अथवा अनावश्यक कार्य बाधा आ रही हो तो इन्हें एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल थोड़ा सा लें, उसमें पांच चुटकी काली तिल, पांच बरगद के पत्ते, एक काला गुलाब जामुन मिठाई, इन समस्त सामग्रियों को अपने हाथ में लेकर ॐ शं शनैश्चराय नम: इस मंत्र का 108 बार जाप करके इस समस्त सामग्री को हालिका दहन के समय अग्नि में समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. नीले कपड़े में 11 चुटकी राख, 11 छोटी लोहे की कील बांधकर घर या व्यापारिक संस्था के मुख्य द्वार पर लटका दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
* कुम्भ राशि:
1. यदि व्यापारिक, शारीरिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा हो, अथवा अनावश्यक कार्य बाधा आ रही हो तो इन्हें एक स्टील की कटोरी में तिल का तेल, 108 दानें साबूत उड़द के, खेजड़ी (झण्डी) के पांच पत्ते या कदंब के पांच पत्ते, पांच काली मिर्च, कोई भी काले रंग की एक मिठाई, इन समस्त सामग्री को अपने हाथ में रख कर मंगलकारी शनि मंत्र की 108 बार जाप करके होलिका दहन के समय अग्नि को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. काले कपड़े में 11 चुटकी होलिका दहन की राख, 7 काजल की डिब्बी बांधकर कारोबारी प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर लटका दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
* मीन राशि:
1. यदि व्यापारिक, शारीरिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा हो अथवा अप्रत्याशित कार्य बाधा आ रही हो तो इन्हें कांसे की कटोरी में बादाम का तेल थोड़ा सा उसमें 108 जोड़े चने की दाल के, कोई भी थोड़ी सी पीली मिठाई, आम के पांच पत्ते, एक गांठ हल्दी, इन समस्त सामग्री को अपने हाथ में लेकर ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं गुरवे नम: मंत्र का 108 बार जाप करके इन समस्त सामग्रियों को हालिका दहन के दिन अग्नि को समर्पित कर दें। सारी समस्याओं का निवारण हो जाएगा।
2. पीले कपड़े में 7 चुटकी होलिका दहन की राख, तांबे के 7 सिक्के और 11 कौड़ी बांधकर घर, दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर लटका दें। सारी व्यावसायिक पीड़ाओं से छुटकारा मिलेगा।
किस  राशि  वाले किस रंग से होली खेले :
(1) मेष - लाल- (2) वृष - नीला- (3) मिथुन - हरा- (4) कर्क - गुलाबी- (5) सिंह - आंरेन्ज
(6) कन्या - हरा- (7) तुला - नीला- (8) वृश्चिक - मैरून- (9) धनु - पीला- (10) मकर - नीला
(11) कुम्भ - परपल- (12) मीन - पीला-
* आप चाहें तो अपने रंगों अबीर गुलाल में खुशबू मिला सकते है |
- किस राशि वाले कौन सी खुशबू  मिलायें |
(1) मेष - गुलाब- (2) वृष - चमेली- (3) मिथुन - चम्पा- (4)  कर्क - लवैन्डर- -(5) सिंह - कस्तूरी-(6) कन्या - नाग चम्पा- (7) तुला -बेला - (8) वृश्चिक - रोज मैरी- (9) धनु -- केसर- (10) मकर -मुश्कम्बर- (11) कुम्भ - चन्दन- (12) मीन - लैमन ग्रास
1) होली के दिन क्या करें और क्या न करें :- सबसे पहली बात तो यह है कि रंग जरुर खेले इस दिन रंग खेलने से जीवन में खुशियों के रंग आते है और मनहूसियत दूर भाग जाती है | अगर आप घर से बाहर  जा कर होली नहीं खेलना  चाहते हैं तो घर पर ही  होली खेलिये लेकिन खेलिये जरुर |
(2) सुबह सुबह पहले भगवान को रंग चढ़ा कर ही होली खेलना शुरू कीजिये |
(3) एक दिन पहले जब होली जलाई जाये तो उसमे जरुर भाग लें | अगर किसी वजह से आप रात में होलीं जलाने के वक्त शामिल न हो पायें तो अगले दिन सुबह सूरज निकलने से पहले जलती हुई होली के निकट जाकर तीन परिक्रमा करें | होली में अलसी , मटर ,चना गेंहू कि बालियाँ और गन्ना इनमे से जो कुछ भी मिल जाये उसे होली की आग में जरुर   डालें |
(4) परिवार के सभी सदस्यों के पैर के अंगूठे से लेकर हाथ को सिर से ऊपर पूरा ऊँचा करके कच्चा सूत नाप कर होली में डालें |
(5) होली की विभूति यानि भस्म (राख) घर जरुर लायें पुरुष इस भस्म को मस्तक पर और महिला अपने गले में लगाये, इससे एश्वर्य बढ़ता है |
(6) घर के बीच में एक चौकोर टुकड़ा साफ कर के उसमे कामदेव का पूजन करें |
(7) होली के दिन दाम्पत्य भाव से अवश्य रहें |
(8) होली के दिन मन में किसी के प्रति शत्रुता का भाव न रखें,  इससे साल भर आप शत्रुओं पर विजयी होते रहेंगे |
( 9 ) घर आने वाले मेहमानों को सौंफ और मिश्री जरुर खिलायें, इससे प्रेम भाव बढ़ता है |

We wish all of you a very happy and colorful HOLI-2014- Ashutosh - Blogger

Thursday, March 13, 2014

यक्ष के प्रश्न, युधिष्ठिर के उत्तर-

संकलन: चतर सिंह 'लुप्त' पारसौली 


वनवास के समय सरोवर के पास यक्ष ने पांडवों से सात सवाल पूछे थे। इनका सही जवाब न देने पर उनमें से चार भाई पत्थर के बन गए थे। अंत में युधिष्ठिर ने उनके सही उत्तर देकर अपने भाइयों का जीवन वापस पाया। युधिष्ठिर और यक्ष के बीच हुए सवाल-जवाब निम्नलिखित थे: 

यक्ष का पहला प्रश्न: वह कौन है जो सोया हुआ होने पर भी आँखें नहीं मूँदता, कौन जन्म लेकर भी चलने का प्रयास नहीं करता, किसके भीतर हृदय नहीं होता और वेग से कौन बढ़ता है? 

युधिष्ठिर का उत्तर: मछली सोने पर पलक नहीं मूँदती, अंडा जन्म लेने पर भी चलने की चेष्टा नहीं करता, पत्थर में हृदय नहीं होता और नदी वेग से बढ़ती है। 

दूसरा प्रश्न: पृथ्वी से भी ज्यादा धारण करने वाला, आकाश से भी ऊँचा और वायु से ज्यादा गतिमान कौन है? 

उत्तर: माता, पृथ्वी से भी ज्यादा धारण करने वाली, पिता आकाश से भी ऊँचा और मन, वायु से अधिक गतिमान होता है। 

तीसरा प्रश्न: घर में, विदेश में, रोग के समय और मृत्यु समय कौन-कौन मित्र होते हैं? 

उत्तर: पत्नी घर में, साथ के यात्री विदेश में, वैद्य रोग में तथा सत्कर्म मृत्यु के समय मनुष्य के सच्चे मित्र होते हैं। 

चौथा प्रश्न: मानव का सबसे बड़ा शत्रु कौन है, कभी न खत्म होने वाली व्याधि क्या है तथा साधु-असाधु कौन होते हैं? 

उत्तर: क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है, लोभ अनन्त व्याधि है, परोपकारी साधु तथा निर्दयी पुरुष ही असाधु है। 

पांचवाँ प्रश्न: श्रेष्ठ धर्म क्या? किसको बस में करने से शोक नहीं होता? 

उत्तर: दया सर्वश्रेष्ठ धर्म है और मन को बस में करने से शोक नहीं होता। 

छठा प्रश्न: धर्म, यश, स्वर्ग एवं सुख कैसे प्राप्त होता है? 

उत्तर: दक्षता से धर्म, दान से यश का, सत्य से स्वर्ग तथा शील से ही सुख की प्राप्ति होती है। 

अंतिम प्रश्न: देवत्व क्या है? सत् पुरुषों का धर्म क्या? इनमें मानुष भाव क्या है? 

उत्तर: वेदों का स्वाध्याय ही देवत्व है, तप ही सत् पुरुषों का धर्म है और मृत्यु मानुषी भाव है। 

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होली के रंग : हर रंग कुछ कहता है



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होली के रंग : हर रंग कुछ कहता है...-----
होली विशेष
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होली आ गई है। धरती से
सुनहरी आभा आ रही है। आकाश में
नीले, लाल बादल अठखेलियां कर रहे हैं, सूरज के साथ
लुका-छिपी खेल रहे हैं। पेड़ों पर
नन्हीं कोंपले आ रही हैं और
पीले-लाल फूल अपनी खुशबू बिखेर रहे
हैं। हर तरफ इंद्रधनुषी रंगों की छटा है
और रंगों के इस कोलाज को देखकर मन मोहक हो जाता है।
रंग का पर्याय ऊर्जा से है, उत्साह से है और उमंग से है।
रंगो का त्योहार होली का ख्याल आते
ही मस्ती सूझने लगती है।
होली आती भी है, नए जोश
और जज्बे का संदेश लेकर। इस संदेश में अलग-अलग रंग
आपको भरपूर मजा लेकर खुलकर जीने का आमंत्रण देते
हैं और बताते हैं कि उनकी तरह
ही सबमें एक विशेषता है।
लाल :
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होली के मौके पर सबसे ज्यादा चाव से जिस रंग
का प्रयोग किया जाता है, वह है लाल रंग। लाल रंग उल्लास और
शुद्धता का प्रतीक है। लाल रंग का प्रयोग हर शुभ
अवसर पर किया जाता है। दरअसल लाल रंग अग्नि का द्योतक है
और ऊर्जा, गर्मी और जोश का प्रतिनिधित्व करता है,
इस लिहाज से होली के दौरान होलिका दहन, मौसम में
गर्मी का आगमन, त्योहार मनाने में जोश का संचार
तो होता ही है, साथ ही त्योहार के साथ
हर वर्ग के लोगों में ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो उन्हें पूरे वर्ष
काम करने के लिए उत्साहित करता है।
पीला :
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पीला रंग पवित्रता का प्रतीक है।
होली के दौरान वातावरण में पीले रंग
की अधिकता होती है। यह रंग सुनहले
रंग के समीप होता है। मिट्टी का रंग
भी पीला होता है और इस मौसम में खिलने
वाले फूल भी अमूमन पीले होते हैं। यह
रंग समृद्धि और यश को इंगित करता है।
हरा :
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हरा रंग जीवन का द्योतक है। इसके साथ
ही यह प्रकृति का सबसे प्यारा रंग है।
होली के दौरान वातावरण में चहुंओर हरे रंग
की आभा आने वाली होती है,
जो नए जीवन के शुरुआत का संकेत देती है
और इस बात की प्रेरणा देती है
कि बीती ताहि बिसार दे, आगे
की सुध लेहि।
यानी होली का हरा रंग हर व्यक्ति को एक
बार फिर अपने में नए जीवन के संचार
की प्रेरणा देता है।
नीला :
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नीला रंग शांति, गंभीर और
स्थिरता का संकेतक है। हालांकि होली में
नीला रंग कम प्रयोग में आता है। लेकिन
कभी-कभी नीले गुलाल और
अबीर देखे जाते हैं। जल और वायु का रंग
नीला माना गया है, इस लिहाज से यह रंग प्राण और
प्रकृति से संबंधित है। नीला रंग पूर्णता को इंगित
करता है।
काला :
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कुछ लोगों को होली में काला रंग लगाने में सबसे
ज्यादा मजा आता है। काला रंग अंतरिक्ष का प्रतीक है।
यह रंग प्रभुत्व का भी प्रतीक है
क्योंकि सभी रंग अपना अस्तित्व खोकर इसमें समाहित
हो जाते हैं।
सफेद :
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सफेद रंग बच्चों का पसंदीदा रंग है। यह
सभी रंगों का जनक माना जाता है। प्रकृति के
सभी रंगों को एक समान मिलने पर सफेद रंग बनता है।
इसलिए इसमें सभी रंगों के गुण मौजूद होते हैं।

होलिका दहन लाभदायक अद्‌भूत प्रयोगों द्वारा संकटों से मुक्ति


दोस्तों होली पर मेरे आलेख जरूर देखे और लाभ ले.

HAPPY HOLI TO ALL OF YOU

http://shreepad-gems.blogspot.in/2011/02/holi-colorful-auspicious-festival.html

http://shreepad-gems.blogspot.in/2012/03/blog-post_6618.html


संकलन -आशुतोष जोशी

होली का त्यौहार  हमारी पौराणिक कथाओं में श्रद्धा विश्वास और भक्ति का त्यौहार माना गया है तथा साथ ही होली के दिन किये जाने वाले अद्‌भूत प्रयोगों से मानव अपने जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति भी पा सकता है। होली हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को मनायी जाती है तथा भद्रारहित समय में होली का दहन किया जाता हैं।

होली की रात होलिका दहन मे से जलती हुई लकडी घर पर लाकर नवग्रहों की लकडियों एवं गाय के गोबर से बने उपलों की होली प्रज्जवलित करनी चाहिए। उसमें घर के प्रत्येक सदस्य को देसी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता चढाना चाहिए तथा सभी को उस होलिका की ग्यारह परिक्रमा करते हुए सूखे नारियल की होली में आहुति देनी चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार आध्यात्मिक महत्व को देखते हुये होली की पूजा तथा दहन के पश्चात बची हुई राख के द्वारा विभिन्न प्रयोग लाभदायक हो सकते हैं।


१. होली की पूजा मुखयतः भगवान विष्णु (नरसिंह अवतार) को ध्यान में रखकर की जाती है।
२. होली दहन के समय  ७ गोमती चक्र  लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।
३. होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।
४. होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का ४० दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी।
५. यदि उधार दिया हुआ पैसा वापस नहीं आ रहा हैं तो होली दहन के दूसरे दिन बचे हुये कोयले से वहीं धरती पर उस व्यक्ति का नाम लिखे तथा उस नाम के उपर हरा रंग इस तरह डाल दें कि पूरा नाम लुप्त हो जाये। इस प्रयोग से वह व्यक्ति शीघ्र धन वापस कर देगा।
६. यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो २१ गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें।
७. नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें।

८. होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें।
९. होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख - समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है।
१०. यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे।

माला में जप के लिए 108 ही मोती क्यों होते हैं?

http://myindialife.blogspot.in/2013/04/108.html

GOOD ARTICLE BY - MR BINIT KUMAR GUPTA


 क्या आप जानते हैं माला में 108 ही मोती क्यों होते हैं इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण मौजूद हैं।

यह माला रुद्राक्ष, तुलसी, स्फटिक, मोती या नगों से बनी होती है। यह माला बहुत चमत्कारी प्रभाव रखती है। किसी मंत्र का जप इस माला के साथ करने पर दुर्लभ कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं।
यहां जानिए मंत्र जप की माला में 108 मोती होने के पीछे क्या रहस्य है...

भगवान की पूजा के लिए मंत्र जप सर्वश्रेष्ठ उपाय है और पुराने समय से बड़े-बड़े तपस्वी, साधु-संत इस उपाय को अपनाते हैं। जप के लिए माला की आवश्यकता होती है और इसके बिना मंत्र जप का फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
रुद्राक्ष से बनी माला मंत्र जप के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। यह साक्षात् महादेव का प्रतीक ही है। रुद्राक्ष में सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश करने की शक्ति भी होती है। इसके साथ ही रुद्राक्ष वातावरण में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करके साधक के शरीर में पहुंचा देता है।

शास्त्रों में लिखा है कि-
बिना दमैश्चयकृत्यं सच्चदानं विनोदकम्।
असंख्यता तु यजप्तं तत्सर्व निष्फलं भवेत्।।
इस श्लोक का अर्थ है कि भगवान की पूजा के लिए कुश का आसन बहुत जरूरी है इसके बाद दान-पुण्य जरूरी है। इनके साथ ही माला के बिना संख्याहीन किए गए जप का भी पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। अत: जब भी मंत्र जप करें माला का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
जो भी व्यक्ति माला की मदद से मंत्र जप करता है उसकी मनोकामनएं बहुत जल्द पूर्ण होती है। माला से किए गए जप अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं। मंत्र जप निर्धारित संख्या के आधार पर किए जाए तो श्रेष्ठ रहता है। इसीलिए माला का उपयोग किया जाता है।
आगे जानिए कुछ अलग-अलग कारण जिनके आधार पर माला में 108 मोती रखे जाते हैं...

माला में 108 मोती रहते हैं। इस संबंध में शास्त्रों में दिया गया है कि...
षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्राण्येकं विशांति।
एतत् संख्यान्तितं मंत्रं जीवो जपति सर्वदा।।
इस श्लोक के अनुसार एक सामान्य पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति दिनभर में जितनी बार सांस लेता है उसी से माला के मोतियों की संख्या 108 का संबंध है। सामान्यत: 24 घंटे में एक व्यक्ति 21600 बार सांस लेता है। दिन के 24 घंटों में से 12 घंटे दैनिक कार्यों में व्यतीत हो जाते हैं और शेष 12 घंटों में व्यक्ति सांस लेता है 10800 बार। इसी समय में देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को हर सांस पर यानी पूजन के लिए निर्धारित समय 12 घंटे में 10800 बार ईश्वर का ध्यान करना चाहिए लेकिन यह संभव नहीं हो पाता है।
इसीलिए 10800 बार सांस लेने की संख्या से अंतिम दो शून्य हटाकर जप के लिए 108 संख्या निर्धारित की गई है। इसी संख्या के आधार पर जप की माला में 108 मोती होते हैं।

एक अन्य मान्यता के अनुसार माला के 108 मोती और सूर्य की कलाओं का संबंध है। एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है। सूर्य वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता हैए छह माह उत्तरायण रहता है और छह माह दक्षिणायन। अत: सूर्य छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है।
इसी संख्या 108000 से अंतिम तीन शून्य हटाकर माला के 108 मोती निर्धारित किए गए हैं। माला का एक-एक मोती सूर्य की एक-एक कला का प्रतीक है। सूर्य ही व्यक्ति को तेजस्वी बनाता है, समाज में मान-सम्मान दिलवाता है। सूर्य ही एकमात्र साक्षात दिखने वाले देवता हैं।

ज्योतिष के अनुसार ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अत: ग्रहों की संख्या 9 का गुणा किया जाए राशियों की संख्या 12 में तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है।
माला के मोतियों की संख्या 108 संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार ऋषियों ने में माला में 108 मोती रखने के पीछे ज्योतिषी कारण बताया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं। हर नक्षत्र के 2 चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल चरण 108 ही होते हैं। माला का एक-एक मोती नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है।


एक अन्य मान्यता के अनुसार हमारे शरीर में कुल 7200 नाडिया होती है और इसमे से 108 हमारे हृदय में होती है. जाप करते समय हृदय के इन 108 में स्वतः कम्पन्न होने लगता है और हमारा ब्राम्हांड से संपर्क बनाने लगता है.  

माला के मोतियों से मालूम हो जाता है कि मंत्र जप की कितनी संख्या हो गई है। जप की माला में सबसे ऊपर एक बड़ा मोती होता है जो कि सुमेरू कहलाता है। सुमेरू से ही जप की संख्या प्रारंभ होती है और यहीं पर खत्म भी। जब जप का एक चक्र पूर्ण होकर सुमेरू मोती तक पहुंच जाता है तब माला को पलटा लिया जाता है। सुमेरू को लांघना नहीं चाहिए। 
जब भी मंत्र जप पूर्ण करें तो सुमेरू को माथे पर लगाकर नमन करना चाहिए। इससे जप का पूर्ण फल प्राप्त होता है।


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