Monday, October 27, 2014

राशि के अनुसार जल के अनुचित प्रयोग का परिणाम



मेष राशि वाले यदि पानी को गंदा करते हैं या बर्बाद करते हैं तो उनकी सुख-सुविधाओं में कमी आ सकती है।

वृष वाले के लिए पानी की बर्बादी का मतलब है उनकी तरक्की में बाधा का आना. यानि की जल की बर्बादी का संबंध पदोन्नति में अड़चन से है।

मिथुन राशि वाले यदि पानी को खराब करते हैं तो उनका संचित धन नष्ट हो सकता है।

कर्क राशि वालों के द्वारा ऐसा करने पर उसके व्यक्तित्व का ही संपूर्ण विकास बाधित हो जाता है।

5 सिंह राशी वाले यदि पानी की बर्बादी करते हैं, तो उनका व्यय अधिक होता है, और बचत नहीं होती है |

पानी को गंदा करने या बर्बाद करने का असर कन्या राशि पर भी पड़ता है। इस राशि वालों की तो आय ही प्रभावित हो जाती है।

तुला राशि वालों के लिए पानी का दुरुपयोग करने का अर्थ है उनके कर्म क्षेत्र का प्रभावित हो जाना।

जल को नष्ट करने वाले यदि वृश्चिक राशि के हैं तो उनका भाग्य नष्ट हो सकता है।

धनु राशि वालों के लिए पानी की बर्बादी का अर्थ है आयु में कमी।

10 मकर राशि वालों के लिए पानी का दुरुपयोग पारिवारिक परेशानी का कारण बनता है।

11 कुंभ राशि वाले यदि पानी को बर्बाद करते हैं तब उन्हें रोग और ऋण का सामना करना पड़ता है।

12 मीन राशि वालों के द्वारा पानी गंदा करने से उनके संतान-सुख में कमी आती है।

- See more at: http://jagritinews.com/lifestyle_details.php?conId=446&catId=3&subcatId=7#sthash.rMoXDbFe.dpuf





Tuesday, October 21, 2014

धनतेरस: राशि अनुसार क्या खरीदें-क्या नहीं, पूजन विधि व शुभ मुहूर्त

FROM THE BHASKAR 

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन से ही दीपावली पर्व का प्रारंभ हो जाता है। इस बार यह पर्व 21 अक्टूबर, मंगलवार को है। इस पर्व पर भगवान धनवंतरि की पूजन का विधान है। ज्योतिष के अनुसार ये दिन खरीदी के लिए बहुत ही शुभ होता है। इस दिन खरीदी गई कोई भी वस्तु लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए राशि के अनुसार धनतेरस पर क्या खरीदें- क्या नहीं-
मेष- उच्च का शनि एवं नीच का सूर्य की पूर्ण दृष्टि से इस राशि वालों को लोहे एवं उससे निर्मित वस्तुओं को खरीदने से बचना चाहिए। सोना, चांदी, बर्तन, गहने, हीरा, वस्त्र खरीदना शुभ होगा। चमड़ा, केमिकल आदि भी नही खरीदें।
वृषभ- सोना, चांदी, पीतल, कांसा, हीरा, कम्प्यूटर, बर्तन आदि की खरीदी शुभ रहेगी। केसर, चंदन की भी खरीदारी कर सकते हैं। फर्टिलाइजर्स, वाहन, तेल, चमड़े एवं लकड़ी आदि से बनी वस्तुओं को खरीदने से बचें।
मिथुन- जमीन, मकान, प्लॉट आदि के सौदे के लिए लाभकारी दिन है। पुखराज सोना, चांदी आदि निश्चिंत होकर खरीदारी करें।
कर्क- शनि की ढय्या होने के कारण अपने नाम के अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर खरीदारी करें तो बेहतर होगा। बच्चों को उपहार देने के लिए किसी वस्तु का खरीदना उचित होगा। सोना खरीदने से बचें। शेयर में निवेश नही करें।
सिंह- वाहन, बिजली उपकरण, स्वर्ण, चांदी, तांबा, पीतल, बर्तन, लकड़ी का सामान खरीद सकते हैं। लोहे एवं सीमेंट से बनी वस्तुएं नही खरीदें। चांदी लाभ दे सकती है। बने हुए मकान एवं फ्लैट आदि भी लाभदायक होंगे।
कन्या- इस दिन आप जमीन आदि खरीद सकते हैं। चंद्र के गोचर एवं राशि स्वामी का प्रथम होने से चांदी की वस्तु नहीं खरीदें। नए वस्त्रों में भी सफेद वस्त्रों का त्याग करें। हीरा एवं सोना भी नहीं खरीदें।
तुला- कोई आवश्यक खरीदारी करना हो तो परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम से करें। सूर्य, शनि एवं शुक्र की युति आपको संभलकर रहने का संकेत करती हैं। निवेश के लिए थोड़ा इंतजार करें।
वृश्चिक- सोना, चांदी, बर्तन, पीतल, वस्त्र, लोहा एवं उससे निर्मित वस्तु खरीद सकते हैं। किसी नए बड़े निवेश से बचें। ब्रांडेड सामान ही खरीदें।
धनु- मंगल का गोचर आपको जमीन-जायदाद से लाभ दिलाने का योग बना रहा हैं। राशि स्वामी गुरु के का होने से कीमती धातुओं से भी लाभ होगा। हीरा एवं कीमती पत्थर भी खरीद सकते हैं।
मकर- समय बहुत ही अच्छा रहेगा। सभी वस्तुओं के खरीद में फायदा प्राप्त करेंगें। वस्त्र एवं सोना विशेष फायदा देने वाला होगा। पारिवारिक उपभोग की वस्तु उपयोगी साबित होगी।
कुंभ- किताबें, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं, लकड़ी का समान, फर्नीचर एवं सजाने के समान खरीदने में ज्यादा रुचि होगी। निवेश के समय अच्छा है। स्थाई संपत्ति खरीदने से बचें।
मीन- सोने चांदी, कीमती नग आदि खरीदने का अच्छा अवसर है। स्थाई संपत्ति में निवेश ठीक नही होगा। शेयर आदि से भी बचें। वस्त्र में लाभ होगा।
खरीदी के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
सुबह 09 से 10:30 शाम तक- चंचल
सुबह 10:30 से दोपहर 12 बजे तक- लाभ
दोपहर 03 से शाम 04:30 बजे तक- शुभ
शाम 07:30 से रात 09 बजे तक- लाभ
इस विधि से करें भगवान धनवंतरि का पूजन
धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की विशेष पूजन-अर्चना की जाती है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार देवताओं व दैत्यों ने जब समुद्र मंथन किया तो उसमें से कई रत्न निकले। समुद्र मंथन के अंत में भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उस दिन कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी ही थी। इसलिए तब से इस तिथि को भगवान धनवंतरि का प्रकटोत्सव मनाए जाने का चलन प्रारंभ हुआ। पुराणों में धनवंतरि को भगवान विष्णु का अंशावतार भी माना गया है। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि का पूजन इस प्रकार करें-
पूजन विधि- सर्वप्रथम नहाकर साफ वस्त्र धारण करें। भगवान धनवंतरि की मूर्ति या चित्र साफ स्थान पर स्थापित करें तथा स्वयं पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। उसके बाद भगवान धन्वन्तरि का आह्वान निम्न मंत्र से करें-
सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं,
अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।
इसके पश्चात पूजन स्थल पर आसन देने की भावना से चावल चढ़ाएं। इसके बाद आचमन के लिए जल छोड़ें। भगवान धन्वन्तरि के चित्र पर गंध, अबीर, गुलाल पुष्प, रोली, आदि चढ़ाएं। चांदी के बर्तन में खीर का भोग लगाएं। (अगर चांदी का पात्र उपलब्ध न हो तो अन्य पात्र में भी भोग लगा सकते हैं।) इसके बाद पुन: आचमन के लिए जल छोड़ें। मुख शुद्धि के लिए पान, लौंग, सुपारी चढ़ाएं। भगवान धन्वन्तरि को वस्त्र (मौली) अर्पण करें। शंखपुष्पी, तुलसी, ब्राह्मी आदि पूजनीय औषधियां भी भगवान धन्वन्तरि को अर्पित करें। रोग नाश की कामना के लिए इस मंत्र का जाप करें-
ऊं रं रूद्र रोग नाशाय धनवंतर्ये फट्।।
इसके बाद भगवान धनवंतरि को श्रीफल व दक्षिणा चढ़ाएं। पूजन के अंत में कर्पूर आरती करें।
पूजन का शुभ मुहूर्त
शाम 07:30 से रात 09 बजे तक- लाभ


Saturday, October 18, 2014

वासुकि नाग-पूजा




"वासुकि नाग-पूजा"


अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम !

शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं च कालियं तथा !!

एतानि नव नामानि नागानां च महत्मानाम !

सांयकाले पठेनित्यम प्रातः विशेषत: !!

तस्य विष भयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् !

सर्व कार्य फल प्राप्ति प्रचछन्नम च धनं लभेत !!

ॐ नमोअस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वी !

म्न्वन्त्रिक्षे ये दिवि तेभ्यः वासुकाद्यष्ट कुल नागेभ्योः नमः !!
 


सभी वैज्ञानिकों के द्वारा और ऋषि मुनियों के द्वारा भी कहा जाता है 

की सर्प इस पृथ्वी पर सभी जगह मिलते हैं ! ये आज हजारों की संख्या

 में अलग अलग प्रजातियों के हैं किन्तु मूलतः इनकी उपरोक्त नौ 

प्रजातियाँ ही हैं और इन्हें महात्मा का स्थान भी प्राप्त है ! इनका 

स्मरण दोनों संध्याओं पर करने से व्यक्ति को कभी विष का भय नहीं 

होता , सभी जगह विजय-श्री भी प्राप्त होती है और पृथ्वी के नीचे रहने

के कारण या गढ़े खजाने पर यक्ष बन बैठने के कारण इनके प्रसन्न 

होने पर साधक को ये प्रसन्न हो खजाना भी दे देते है ! 

राहू की दशा में जैसे लाटरी का लगना आदि !





"गोमती चक्र"

"गोमती चक्र"


१)गोमती चक्र को रोगी  के बिस्तर पर रखने से जल्दी अच्छा होता हे ..

२)रविवार के दिन थोडा सिंदूर गोमती चक्र पर लगा के शत्रु का नाम लेकर नदी या तालाब में 

डालने से शत्रु पर प्रभाव रहेता हे, कोर्ट -कचहरी में सफलता मिलती हे 

३)कोई भी काम क पूरा करने के लिये एक गोमती चक्र घर के दरवाजे की चोखट पे रखे उस को 

बाए पैर के निचे दबाके दाए पैर से बहार आने से काम में सफलता मिलती हे 

४)एक गोमती चक्र को शुभ दिन गंगा जल में रखिये थोड़े समय बाद उस पर केसर लगाये और 

अगरबत्ती का धुप देकर आलमारी में रखने से आर्थिक संकट  दूर होता  हे 

५)सुफला एकादशी की रात को पांच गोमती चक्र की पूजा करके उस पर केसर का तिलक कर के 

साथ में शालिंग्राम की भी पूजा करने से धन लंबे समय तक टिकता हे 

६)जिस वास्तु में अशुभ तत्व और भुत /प्रेत का वास हो या ऐसा शक हो तो दो गोमती चक्र,

 घर के बड़े व्यक्ति के सिर पर से सात बार उतार के उस को अग्नि में डाल दीजिए 

७)जिस वास्तु में बीमारी घर कर गई हो अनेक दवाई लेने से भी बीमारी दूर ना होती हो तो एक

 गोमती चक्र शुध्ध चांदी में बना के पेशन्ट के गले में बाँध ने से अच्छा रहेता हे 

८)दो गोमती चक्र मुख्य द्वार पर ऐसे लगाये की ग्राहक उसके नीचे से होकर अंदर आए, 

व्यवसाय में सफलता मिलेगी 

09)कोई विद्वान ब्राह्मण को दो गोमती चक्र देने से मान -सन्मान बढ़ता हे



Friday, October 17, 2014

जब भूत प्रेत या नकारात्मक शक्ति सताने लगे


कहते हैं कि इस दुनिया से अलग एक दूसरी दुनिया है जो लोक और परलोक के बीच में है। यह दुनिया है आत्माओं की दुनिया। कुछ लोग इस दुनिया में रहने वालों को भूत प्रेत कहते हैं। कुछ लोग इन्हें भटकती आत्मा कहते हैं।
भूत प्रेत और भटकती आत्माएं हमेशा इंसानों से दूर रहना पसंद करती हैं लेकिन कभी कुछ ऐसा संयोग बना जाता है जब भटकती आत्माएं अपनी दुनिया से निकलकर किसी चाहत को पूरा करने के लिए इंसानों की दुनिया में आ जाते हैं।
ऐसी स्थिति में इंसान को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं से बचने के लिए वर्षों से देश के कई भागों एक टोटका आजमाया जाता है। जब कभी आपको भी लगे कि नकारात्मक उर्जा यानी ऊपरी चक्कर है तो एक बर्तन में सरसों का तेल लेकर आग पर गर्म करें।
इसमें चमड़े का एक टुकड़ा डालें। जब धुआं निकलने लगे, इसमें नींबू, थोड़ी सी फिटकरी, तीन काली चूड़ी और एक कील डाल दें। इसे पीड़ित व्यक्ति के सिर के ऊपर से सात बार घुमाएं। इसके बाद इसे कहीं गड्ढ़ा खोदकर दबा दें। इसके ऊपर एक कील ठोंक दें।
माना जाता है कि ऐसा करने से पीड़ित व्यक्ति से भूत-प्रेत का साया या यूं कहें नकारात्मक शक्ति का असर दूर हो जाता है।
नोट: यह पारंपरिक घरेलू टोटका हैं।  श्रीपद जेम्स ब्लॉगर का इससे किसी प्रकार का कोई सरोकार नहीं है।

We deal with quality-Gemstones, Rudraksh, Parad & Sphatic Idols, etc. at very reasonable Prices. 

 Call us at +918817576868, OR SMS "Shreepad". 

 We wish all our readers, a happy and prosperous Diwali-2014. 

 ASHUTOSH - 
(Astrologer,Vaastu Consultant & Palmist)

*****