Wednesday, July 29, 2015

भारत रत्न एवं हमारे पूर्व राष्ट्रपति, दुनिया के महान वैज्ञानिक , देश-भक्त डा. कलाम - ( दैनिक भास्कर से साभार )


ये पूरा आलेख दैनिक भास्कर से लिया गया है, तथा इस आलेख को अन्तिम शब्द तक हर बच्चे, बुढे और जवान को पढना चाहिये.   यदि आपने भी उनके अनुभव, विचार, साद्गी और सह्रदयता को अपनाने की कोशिश की तो आप अपना व्यक्तित्व तथा जीवन दोनों बदल सकते है, 


(पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने किताबों के को-ऑथर व सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक्सपर्ट सृजन पाल सिंह के साथ मिलकर यह लेख लिखा था। श्री सिंह ने ही यह लेख दैनिक भास्कर को उपलब्ध कराया था। संभवत: यह डॉ.कलाम का अंतिम लेख है।)
हमारे पास वह सब कुछ है, जो हमें ऐसे राष्ट्र में रूपांतरित कर सकता है कि दुनिया के देशों में हम गर्व से सिर उठाकर चल सके। वैभव के शिखर पर जाने का रोडमैप क्या है? शोध, डिजाइन, विकास, उत्पादन और फिर सच्चे अर्थों में भारत में निर्मिति। यही है मैक इन इंडिया को साकार करने का अर्थ। हमारे पास ऐसी बौद्धिक क्षमता है कि जो चीज हमें दूसरे देश नहीं देते हम उन्हें विकसित कर लेते हैं। दुनिया के 15 बड़े निर्यातक देशों में मैन्यूफैक्चरिंग की सबसे कम लागत हमारे यहां है और उद्यमशीलता के मामले में हमारी बराबरी अमेरिका की सिलिकॉन वैली से होती है। जाहिर है नौजवानों के लिए व्यापक अवसर हैं। आइए इन क्षमताओं को विस्तार से जानें।

वर्ष 1975 में इसरो में हमें एक नया डिवाइस विकसित करने के लिए बेरिलियम डायफ्राम चाहिए था। आज आपको यह डायफ्राम ज्यादातर ऊंचे दर्जे के स्पीकर में दिखाई देगा, लेकिन चार दशक पहले कुछ ही देशों में ऐसे डायफ्राम बनाने की काबिलियत थी। हमने अमेरिका की एक कंपनी से संपर्क किया। कंपनी अच्छा ऑर्डर देखते हुए खुशी-खुशी राजी हो गई और कागजात तैयार कर लिए गए। जब हम लेन-देन पूरा करने ही वाले थे कि उनके एग्ज़ीक्यूटिव का फोन आया कि वे यह सौदा नहीं कर सकते। हमें पता चला कि अमेरिकी सरकार ने बिक्री रोक दी है, क्योंकि वही मटेरियल उनकी मिसाइलों में इस्तेमाल किया जाता था। चूंकि हमें डायफ्राम की बहुत जरूरत थी, हमने इसके बारे में जानना शुरू किया।

अमेरिका के बेरिलियम डायफ्राम जापान में बनी बेरिलियम छड़ों से बनते थे, जिन्हें प्रशांत महासागर के पार भेजा जाता था। फिर और भी चौंकाने वाली जानकारी मिली। बेरिलियम एक दुर्लभ तत्व है और मुट्ठीभर देशों के पास ही इसका कच्चा माल था। बेरिलियम के शीर्ष चार उत्पादकों में भारत भी था। तथ्य तो यह था कि बेरिलियम छड़ें बनाने वाली जापानी कंपनी ने कच्चा माल भारत से ही आयात किया था। हमें यह जानकर दुख हुआ कि एक ऐसा पदार्थ जिसका कच्चा माल खासतौर पर हमारे पास है, वहीं हमें देने से इनकार कर दिया गया। जल्दी ही शीर्ष चार शोध प्रयोगशालाओं की समिति बनाई गई और उसे बेरिलियम डायफ्राम भारत में बनाने की चुनौती दी गई। चार माह के वक्त में हमें कामयाबी मिल गई।

अगस्त 2014 में बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप ने दुनिया के विभिन्न देशों में उत्पादन की लागत की तुलना की, जिसमें श्रम लागत, बिजली और प्राकृतिक गैस जैसे तत्वों का ध्यान रखा गया था। हमने रिपोर्ट का विश्लेषण किया तो चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया। मसलन, दुनिया सबसे बड़ा निर्यातक चीन उत्पादन या मैन्यूफेक्चरिंग के लिए निर्यात की दृष्टि से 15वें स्थान पर मौजूद भारत की तुलना में 10 अधिक महंगा था। दूसरे और तीसरे सबसे बड़े निर्यातक क्रमश: जर्मनी व अमेरिका मैन्यूफेक्चरिंग के लिए क्रमश: 40 से 15 फीसदी महंगे थे।

वास्तविकता तो यह थी कि वे सभी 14 देश जो भारत से आगे थे उत्पादन के लिए भारत से महंगे थे और शीर्ष 25 निर्यातक देशों में 21वीं पायदान का इंडोनेशिया ही उत्पादन के मामले में भारत से सस्ता था। आदर्श स्थिति तो यही होनी चाहिए थी कि अंग्रेजी बोलने वाले सस्ते श्रम बल के साथ भारत विश्व अर्थव्यवस्था की उत्पादन व निर्यात राजधानी होनी चाहिए। ठीक चीन की तरह और उसी को वैश्विक माल की मात्रा व कीमतें तय करना चाहिए। इसमें तीन बाधाएं हैं- पहला तो भारत में बिज़नेस करने में आने वाली प्रक्रियागत कठिनाइयां (142वां स्थान), कमजोर आधारभूत ढांचा खासौतर पर सड़कें ( 59वां स्थान) और नीतिगत मुद्दे व भ्रष्टाचार (85वां स्थान)।

नवंबर 2014 की शुरुआत में हम चीन गए, जहां हमने उनकी सफलता और उनके लिए भीतर से मौजूद खतरों को समझने का प्रयास किया- खासतौर पर युवा छात्रों के दृष्टिकोण से। तीन चीजें उभरकर सामने आई। पहला व उजला पहलू कि चीन की एडवान्स प्लानिंग बहुत अच्छी है। विज़न केंद्रीय स्तर पर तय किया जाता है और प्रशासन के एकदम निचले स्तर शुरुआत कर माइक्रो प्लान विकसित किए जाते हैं। प्रत्येक प्रशासनिक इकाई को लक्ष्य दिया जाता है और उसी से यह तय होता है कि उन्हें हटाया जाएगा या पदोन्नति मिलेगी। दूसरा थोड़ा अंधेरा पहलू यह है कि चीन उन प्रमुख शहरों में होते पर्यावरण नुकसान के दबाव में परेशान है, जिनकी संख्या बहुत बढ़ गई है।
हाल की आर्थिक दौलत ने उन्हें ऊर्जा की ऊंची खपत और प्रदूषण फैलाने वाला बना दिया है। पिछले दो दशकों की एक बच्चे की नीति भी श्रम बल की कमी के रूप में सामने आई है। श्रम बल की प्रमुखता वाला कोई भी बिज़नेस प्लान सरसरीतौर पर खारिज कर दिया जाता है (चीन में हर बिज़नेस प्लान को सरकारी मंजूरी लगती है)। तीसरा, चीन तथा उसकी कम्युनिस्ट सरकार देख रहे हैं कि इनोवेटिव डिज़ाइनिंग व आइडिया के क्षेत्र में एकदम खालीपन आ गया है।
मौजूदा चीजों को चुनौती देने के लिए इनोवेशन तो अपरिहार्य है, लेकिन यह सरकारी की कार्यशैली के ठीक विपरीत होता है। हम जिन युवाओं से मिले उनमें यही प्रमुख चिंता थी। अक्टूबर 2014 में हमारे प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ का आह्वान किया। यह संकल्प और उसे उद्योग जगत से मिले उत्साहवर्द्धक प्रतिसाद के मामले में इसकी तुलना सिर्फ 1990 के दशक में प्रधानमंत्री नरसिंह राव के उदारीकरण के आह्वान से ही की जा सकती है।
भारत विश्व अर्थव्यवस्था की उत्पादन और निर्यात राजधानी होनी चाहिए
तथ्य तो यह था कि बेरिलियम छड़ें बनाने वाली जापानी कंपनी ने कच्चा माल भारत से ही आयात किया था। हमें यह जानकर दुख हुआ कि एक ऐसा पदार्थ जिसका कच्चा माल खासतौर पर हमारे पास है, वही हमें देने से इनकार कर दिया गया। जल्दी ही शीर्ष चार शोध प्रयोगशालाओं की समिति बनाई गई और उसे बेरिलियम डायफ्राम भारत में बनाने की चुनौती दी गई। चार माह के वक्त में हमें कामयाबी मिल गई।हमने रिपोर्ट का विश्लेषण किया तो चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया। मसलन, दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक चीन उत्पादन या मैन्युफेक्चरिंग के लिए निर्यात की दृष्टि से 15वें स्थान पर मौजूद भारत की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक महंगा था। दूसरे और तीसरे सबसे बड़े निर्यातक क्रमश: जर्मनी व अमेरिका मैन्युफेक्चरिंग के लिए क्रमश: 40 व 15 फीसदी महंगे थे।
वास्तविकता तो यह थी कि वे सभी 14 देश जो भारत से आगे थे, उत्पादन के लिए भारत से महंगे थे और शीर्ष 25 निर्यातक देशों में 21वीं पायदान का इंडोनेशिया ही उत्पादन के मामले में भारत से सस्ता था। आदर्श स्थिति तो यही होनी चाहिए थी कि अंग्रेजी बोलने वाले सस्ते श्रम बल के साथ भारत विश्व अर्थव्यवस्था की उत्पादन व निर्यात राजधानी होनी चाहिए। नवंबर 2014 की शुरुआत में हम चीन गए, जहां हमने उनकी सफलता और उनके लिए भीतर से मौजूद खतरों को समझने का प्रयास किया- खासतौर पर युवा छात्रों के दृष्टिकोण से। तीन चीजें उभरकर सामने आईं। पहला व उजला पहलू कि चीन की एडवान्स प्लानिंग बहुत अच्छी है।
विज़न केंद्रीय स्तर पर तय किया जाता है और प्रशासन के एकदम निचले स्तर पर शुरुआत कर माइक्रो प्लान विकसित किए जाते हैं। प्रत्येक प्रशासनिक इकाई को लक्ष्य दिया जाता है और उसी से यह तय होता है कि उन्हें हटाया जाएगा या पदोन्नति मिलेगी। दूसरा थोड़ा अंधेरा पहलू यह है कि चीन उन प्रमुख शहरों में होते पर्यावरण नुकसान के दबाव से परेशान है, जिनकी संख्या बहुत बढ़ गई है। हाल की आर्थिक दौलत ने उन्हें ऊर्जा की ऊंची खपत और प्रदूषण फैलाने वाला बना दिया है। पिछले दो दशकों की एक बच्चे की नीति भी श्रम बल की कमी के रूप में सामने आई है। श्रम बल की प्रमुखता वाला कोई भी बिज़नेस प्लान सरसरीतौर पर खारिज कर दिया जाता है (चीन में हर बिज़नेस प्लान को सरकारी मंजूरी लगती है)।
तीसरा, चीन तथा उसकी कम्युनिस्ट सरकार देख रहे हैं कि इनोवेटिव डिज़ाइनिंग व आइडिया के क्षेत्र में एकदम खालीपन आ गया है। अक्टूबर 2014 में हमारे प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ का आह्वान किया। यह संकल्प और उसे उद्योग जगत से मिले उत्साहवर्द्धक प्रतिसाद के मामले में इसकी तुलना सिर्फ 1990 के दशक में प्रधानमंत्री नरसिंह राव के उदारीकरण के आह्वान से ही की जा सकती है। अब महत्वपूर्ण सवाल तो यही है कि मेक इन इंडिया को साकार कैसे करें? इसका रोडमैप क्या हो? और सबसे बड़ी बात मेक इन इंडिया के आगे शोध, डिजाइन, विकास, उत्पादन और फिर सच्चे अर्थों में भारत में निर्मिति कैसे हो? शेष दुनिया की तुलना में भारत को इसकी 50 करोड़ युवा आबादी का फायदा है। अनुमान है कि 2016 तक कुशल श्रम बल में जोड़ा गया हर चौथा व्यक्ति भारतीय हो सकता है, लेकिन यह अनिवार्य है कि श्रम बल के रोजगार पाने की काबिलियत सुनिश्चित की जाए। जाहिर है नौजवानों के सामने बहुत बड़ा मौका है।

नई दिल्‍ली. पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम 83 साल की उम्र में भी एकदम एक्टिव थे। जीवन में सादगी का सिद्धांत भी उन्‍होंने अंतिम वक्‍त तक निभाया। सोमवार को अंतिम सफर पर भी वह गुवाहाटी से शिलांग कार में गए। पहाड़ी रास्‍तों पर 110 किलोमीटर का यह सफर उन्‍होंने दोपहर 2.30 बजे शुरू किया था और शाम 5.45 बजे वह‍ शिलांग में आईआईएम के गेस्‍ट हाउस पहुंचे थे। (डॉ. कलाम के आखिरी शब्‍द क्‍या थे, यहां पढ़ें)
जवान से आखिरी मुलाकात
शिलांग में डॉ. कलाम ने एक जवान से मिलने की इच्‍छा जताई थी। वह जवान उनकी पायलट व्‍हीकल पर ड्यूटी पर था। रास्ते में वह कलाम की सिक्युरिटी में ढाई घंटे तक खड़ा था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के ट्विटर अकाउंट से इस मुलाकात की जानकारी दी गई है और फोटो भी शेयर की गई है। In memoryof Dr.Kalam ‏@APJAbdulKalam ने ट्वीट किया, ''पायलट व्हीकल में करीब ढाई घंटे तक खड़े रहने वाले इस जवान से डॉ. कलाम ने मिलना चाहा था। यह उनकी अंतिम मुलाकात थी।'' बता दें कि सोमवार को शिलांग में लेक्चर देते हुए डॉ कलाम को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद अस्पताल में उनका निधन हो गया।
क्यों जवान से मिलना चाहते थे डॉ. कलाम
कलाम के सहयोगी सृजन पाल सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस पूरी घटना का जिक्र किया है। उनके मुताबिक, '' गुवाहाटी से शिलांग जाते हुए हमारे काफिले में 6-7 कारें थीं। हम दूसरे नंबर की कार में थे। हमारे आगे एक ओपेन जिप्सी चल रही थी जिसमें तीन जवान थे। उसमें से दो जवान अगल-बगल बैठे थे लेकिन तीसरा हाथ में बंदूक लिए खड़ा था। एक घंटे की यात्रा के बाद डॉ. कलाम ने कहा- वह खड़ा क्यों है? वह थक जाएगा। यह तो एक सजा जैसी है। क्या आप वायरलेस से उसे बैठने का संदेश दे सकते हैं।'' सृजन ने लिखा है कि उसके बाद उन्होंने रेडियो ट्रांसमिशन से मैजेस देने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। पोस्ट के मुताबिक, ''अगले डेढ़ घंटे तक वे (कलाम) मुझे तीन बार उस जवान को बैठने के लिए रिमाइंड कराते रहे। इसके बाद भी जब हम जवान को बैठाने में सफल नहीं हुए तो उन्होंने अंतिम में मुझे कहा कि वह जवान से मुलाकात कर के उसका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं।'' इसी के बाद जब वे आईआईएम शिलांग पहुंचे तो मैंने उस जवान से मुलाकात कराई। डॉ, कलाम ने उस जवान से हाथ मिलाते हुए पूछा था, ''आप थक गए होंगे? क्या कुछ खाना चाहेंगे। मुझे माफ करना, आपको अतनी देर तक मेरे कारण खड़ा रहना पड़ा।'' यह सुन कर जवान सरप्राइज रह गया और उसने केवल इतना कहा- सर, आपके लिए तो 6 घंटे तक भी खड़े रहेंगे।
शिलांग में सोमवार को अस्पताल में डॉ. कलाम के निधन के बाद खबर मिलते ही हजारों लोग हॉस्पिटल पहुंच गए। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर हॉस्पिटल के बाहर लाया गया, लोगों की आंखों से आंसू झलक पड़े। लोगों ने 'कलाम जिंदाबाद',‘कलाम अमर रहे’ के नारे लगाए। पार्थिव शरीर को हॉस्पिटल से बाहर ला रहे सेना के जवानों और अफसरों की आंखें भी नम थीं। देर रात तक शिलांग में लोग हॉस्पिटल के बाहर कलाम के प्रति अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए जुटे रहे।
मंगलवार की सुबह उनका पार्थिव शरीर शिलांग से गुवाहाटी लाया गया तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे। दिल्‍ली में भी उनका पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचने से पहले ही वहां हजारों की संख्‍या में लोग जमा हो गए। (पढ़ें ताजा अपडेट्स)

शिलांग. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर गुवाहाटी से दिल्‍ली एयरपोर्ट पहुंच गया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और तीनों सेनाओं के चीफ ने भी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद, उनका पार्थिव शरीर 10 राजाजी मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास ले जाया गया। शाम चार बजे से लोग यहां उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। कलाम के पार्थिव शरीर को जब उनके आधिकारिक आवास ले जाया जा रहा था तो रास्ते में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों ने उनको अंतिम विदाई दी। बता दें कि कलाम का का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर रामेश्वरम में होगा। सोमवार शाम मेघालय की राजधानी शिलांग में लेक्‍चर देते वक्‍त मंच पर ही दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।
कलाम का पार्थिव शरीर 10 राजाजी मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास पहुंचा।
* स्कूली बच्चे सड़कों पर नजर आए। कलाम को आखिरी विदाई दी।
* एयरपोर्ट से राजाजी मार्ग के सरकारी आवास पर ले जाया जा रहा है पार्थिव शरीर। आम लोग 4 बजे से कर सकेंगे अंतिम दर्शन।
* पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि।
* रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने एयरपोर्ट पर डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि दी।
* एयरपोर्ट पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, एलजी नजीब जंग ने भी दी श्रद्धांजलि।
* राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी पहुंच रहे हैं एयरपोर्ट।
* रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर एयरपोर्ट पहुंचे।
* कुछ ही देर में दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड करेगा डॉ. कलाम का पार्थिव शरीर ले कर आ रहा एयरफोर्स का प्लेन (C-130 J Super Hercules)।
* मंगलवार को संसद शुरू होते ही दोनों सदनों में डॉ. कलाम को श्रद्धांजिल दी गई। श्रद्धांजलि देने के बाद संसद की कार्यवाही को 30 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई।
* गृह नगर रामेश्वरम में डॉ. कलाम का कल अंतिम संस्कार किया जाएगा।
* राष्ट्रीय अविष्कार अभियान से जुड़ेगा डॉ. कलाम का नाम। एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने किया एलान। इस अभियान की शुरुआत कुछ दिन पहले डॉ. कलम ने ही की थी।
* बीजेपी के पार्लियमेंट्री बोर्ड की बैठक दी गई डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि।
* दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा- देश के आम नागरिक के प्रेसिडेंट थे कलाम। उनके निधन से भारी क्षति।
* रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और तीनों सेनाओं के चीफ भी पहुंचेगे एयरपोर्ट
* 12.30 बजे एयरपोर्ट पर लैंड करेगा एयरफोर्स का प्लेन।
* दिल्ली के 10 राजाजी मार्ग पर रखा जाएगा डॉ. कलाम का पार्थिव शरीर, घर के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा। पहुंचे सेना के जवान।
* संसद में दी जाएगी डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि।
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कैबिनेट के साथ पीएम करेंगे बैठक।
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गुवाहाटी में सीएम तरुण गोगोई ने दी श्रद्धांजलि।
* देश में सात दिनों का राष्ट्रीय शोक पर मंगलवार को खुले रहेंगे सारे सरकारी ऑफिस।
कैसे हुआ निधन
सोमवार शाम 83 साल के डॉ. कलाम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, शिलांग में 'पृथ्‍वी को रहने लायक कैसे बेहतर बनाया जाए' टॉपिक पर लेक्चर दे रहे थे। उन्‍होंने लेक्‍चर शुरू ही किया था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें बेथनी अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन शाम 7.45 बजे अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. जॉन ने बताया कि डॉ. कलाम नहीं रहे। डॉ. जॉन ने बताया कि 7 बजे उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। (डॉ. कलाम के 11 सिद्धान्त, जिससे सीखा पूरे देश ने)
सात दिन का राष्ट्रीय शोक
गृह मंत्रालय के अनुसार कलाम के सम्मान में 27 जुलाई से 02 अगस्त 2015 तक राष्ट्रीय शोक रहेगा। इस दौरान देशभर में सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इस दौरान सरकारी स्तर पर किसी भी तरह के मनोरंजन कार्यक्रम या समारोह का आयोजन नहीं किया जाएगा। (वैज्ञानिक बनने से पहले टूटा था एयरफोर्स में जाने का डॉ. कलाम का सपना)
पृथ्वी पर लेक्चर देने गए थे शिलांग
IIM, शिलॉन्ग में डॉ. कलाम लिवेबल प्लैनेट अर्थ सब्जेक्ट पर लेक्चर दे रहे थे। इस बारे में उन्होंने ट्वीट भी किया था, जो उनका आखिरी ट्वीट साबित हुआ। उनका ट्वीट ये था-
@APJAbdulKalam 
Going to Shillong.. to take course on Livable Planet earth at iim.
With @srijanpalsingh and Sharma.
कौन थे कलाम
15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे कलाम ने 2002 में देश के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। वे मिसाइलमैन के रूप में भी मशहूर रहे। (देखिए, डॉ. कलाम के RARE PHOTOS)
- डॉ. कलाम लम्बे समय तक डीआरडीओ से जुड़े रहे।
- देश के पहले स्वदेशी उपग्रह पीएसएलवी-3 के विकास में अहम योगदान दिया था।
- पृथ्वी और अग्नि जैसी मिसाइलें बनाने में बड़ा रोल।
- 1998 के पोकरण परमाणु परीक्षण को लीड किया।
- 1997 में देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजे गए।
- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वैज्ञानिक सलाहकार रहे।
- सोशल मीडिया पर सक्रिय थे।
- खाली समय में संगीत सुनने का शौक था।
- बचपन में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए अखबार तक बेचा।
- ताउम्र अविवाहित रहे।
एक सपना रह गया अधूरा
डॉ. कलाम का एक सपना अधूरा रह गया। वह इन दिनों एक किताब लिख रहे थे। किताब के सह लेखक व्ही पोनराज ने बताया कि कलाम तमिल भाषा में एक किताब लिख रहे थे। इस किताब के सात अध्याय लिखे जा चुके हैं। इस किताब को विजन 2020 का सामानांतर संस्करण है। इसमें तमिलनाडु के विकास पर विस्तार से बताया गया है। सह लेखक पोनराज कहते हैं कि कलाम से उनकी किताब के संबंध में 23 जुलाई को अंतिम बार बातचीत हुई थी।
नई दिल्ली. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आईआईएम शिलॉन्ग के स्टूडेंट्स से अपने लेक्चर के बाद एक सवाल पूछ पाते, इससे पहले ही वे बेहोश हो गए और फिर स्टूडेंट्स के बीच नहीं लौट सके। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम के सोमवार को अचानक यूं चले जाने के बाद छह साल से उनके पर्सनल असिस्टेंट रह सृजन पाल सिंह सोमवार की रात बेचैन रहे। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी। इसमें उन्होंने डॉ. कलाम के आखिरी दिन का ब्योरा दिया और आठ किस्से बताए। साथ ही वह सवाल भी बताया जो डॉ. कलाम के मन में था और जिसे वे आईआईएम स्टूडेंट्स से पूछना चाहते थे। पढ़ें सृजनपाल सिंह का दिया पूरा ब्योरा-
वह आखिरी सूट...
‘‘ कई घंटे बीत चुके हैं, हमने एकदूसरे से बात नहीं की है। ...नींद कोसों दूर है। यादें रह-रहकर आ रही हैं। बीच-बीच में आंसू भी। 27 जुलाई को हमारा दिन दोपहर 12 बजे शुरू हुआ था। हमने गुवाहाटी की फ्लाइट ली। डॉ. कलाम 1ए अौर मैं 1सी सीट पर था। वे डार्क कॉलर वाला कलाम सूट पहने हुए थे। मैंने उन्हें कॉम्प्लीमेंट किया। कहा- नाइस कलर! मुझे क्या पता था कि डॉ. कलाम को मैं इस सूट में दोबारा नहीं देख पाऊंगा। ’’
‘‘ मानसून की बारिश के बीच हम ढाई घंटे में गुवाहाटी पहुंचे। खराब मौसम के कारण जब प्लेन झटका खाता था और मैं भी कांपने लगता था तो डॉ. कलाम विंडो गिरा देते थे और कहते थे- अब तुम्हें डर नहीं लगेगा। गुवाहाटी पहुंचने के बाद भी ढाई घंटे का सफर तय कर हम शिलॉन्ग पहुंचे। पांच घंटे के इस सफर के दौरान हम कई मुद्दों पर बात की, डिस्कस किया, डिबेट किया। हमने बीते छह साल में कितने ही सैकड़ों घंटों की फ्लाइट और ड्राइव एकसाथ की थी। हर सफर की तरह यह भी खास था। ’’
किस्सा 1 : ऐसे तो 30 साल में रहने लायक भी नहीं बचेगी ये धरती...
‘‘ इस सफर में हमने तीन मुद्दों पर चर्चा की। सबसे पहले- डॉ. कलाम पंजाब में हुए हमलों को लेकर काफी फिक्रमंद थे। बेकसूरों की जान जाने की वजह से वे दुखी थे। आईआईएम शिलॉन्ग में उनके लेक्चर का टॉपिक था- क्रिएटिंग ए लिवेबल प्लेनेट अर्थ। उन्होंने इसे पंजाब में हुए हमलों से जोड़कर सोचा और कहा- ऐसा लगता है कि पॉल्यूशन की तरह इंसान भी इस धरती पर मौजूद जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। हमने डिस्कस किया कि कैसे हिंसा, पॉल्यूशन और इंसानों की बेलगाम हरकतों के कारण एक दिन यह पृथ्वी हमसे छूट जाएगी। डॉ. कलाम ने कहा- शायद 30 साल में यह रहने लायक नहीं बचेगी। तुम लोगों को इस बारे में कुछ करना चाहिए। आखिर इसमें तुम्हारा ही फ्यूचर छुपा है। ’’
किस्सा 2 : स्टूडेंट्स से वह आखिरी सवाल जो डॉ. कलाम पूछ ही न सके...
‘‘ दूसरा टॉपिक नेशनल था। डॉ. कलाम बीते दो दिन से इस बात को लेकर फिक्रमंद थे कि पार्लियामेंट में बार-बार हंगामा हो रहा है। उन्होंने कहा- मैंने अपने टेन्योर में दो अलग-अलग सरकारें देखीं। इसके बाद का भी वक्त देखा। यह हंगामा लगातार होता है। यह सही नहीं है। मैं वाकई में ऐसा तरीका ढूंढना चाहता हूं जिससे पार्लियामेंट सिर्फ डेवलपमेंटल पॉलिटिक्स पर ही काम करे। इसके बाद उन्होंने मुझसे आईआईएम शिलॉन्ग के स्टूडेंट्स के लिए सरप्राइज असाइनमेंट क्वेश्चन तैयार करने को कहा। यह सवाल वे अपने लेक्चर के बाद स्टूडेंट्स से पूछना चाहते थे। वे चाहते थे कि स्टूडेंट्स ही ये सुझाएं कि पार्लियामेंट को ज्यादा प्रोडक्टिव और वाइब्रेंट बनाने के क्या इनोवेटिक तरीके हो सकते हैं? लेकिन इसके बाद वे फिर मुद्दे पर लौटे। बोले- मैं उनसे कैसे सॉल्यूशन मांग सकता हूं। जब खुद मेरे पास ही सॉल्यूशन ही नहीं है। अगले एक घंटे तक हम इस बारे में कई ऑप्शंस पर चर्चा करते रहे। वे चाहते थे कि यह सवाल-जवाब और डिस्क्शन उनकी अगली बुक ‘एडवांटेज इंडिया’ में भी आए। ’’
किस्सा : 3 इतने विनम्र की तीन बार कमांडो से बैठने को कहा...
‘‘ डॉ. कलाम के साथ आखिरी सफर में तीसरा किस्सा उनकी विनम्रता का है। हम 6 से 7 कारों के काफिले में चल रहे थे। डॉ. कलाम और मैं दूसरे नंबर की कार में थे। हमारे आगे एक ओपन जिप्सी चल रही थी। उसमें तीन जवान थे। दो जवान बैठे थे। एकजवान हाथ में गन लेकर खड़ा था। एक घंटे के सफर के बाद डॉ. कलाम ने सवाल किया- वह खड़ा क्यों है? वह थक जाएगा। ऐसा करना तो सजा जैसा है। क्या तुम वायरलेस पर मैसेज भेजकर उससे बैठने को कहोगे? मैंने डॉ. कलाम से कहा कि शायद उस जवान को सिक्युरिटी के मद्देनजर खड़े ही रहने को कहा गया होगा। लेकिन वे नहीं माने। फिर मैंने रेडियो मैसेज भेजने की कोशिश की। लेकिन मैसेज नहीं पहुंचा। अगले डेढ़ घंटे तक डॉ. कलाम ने तीन बार मुझे याद दिलाकर कहा कि मैं हाथ से इशारा कर उसे बैठने को कहूं। आखिरकार जब बात नहीं बनी तो उन्होंने कहा कि मैं उससे मिलकर शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। ’’
‘‘ बाद में जब हम आईआईएम शिलॉन्ग पहुंचे तो मैंने सिक्युरिटी स्टाफ से पूछा और उस जवान को बुलाया। उसे मैं डॉ. कलाम के कमरे में ले गया। डॉ. कलाम ने जवान से हाथ मिलाया और शुक्रिया कहा। उन्होंने जवान से पूछा- क्या तुम थक गए हो? क्या तुम कुछ खाना चाहाेगे? मैं माफी चाहता हूं कि तुम्हें मेरी वजह से इतनी देर खड़े रहना पड़ा। ...इस बात से जवान को काफी ताज्जुब हुआ। वह कुछ बोल नहीं पाया। उसने इतना ही कहा- सर, आपके लिए तो 6 घंटे भी खड़े रहेंगे। ’’
किस्सा : 4. स्टूडेंट्स को कभी इंतजार मत कराओ...
इसके बाद हम लेक्चर हॉल गए। कलाम लेक्चर के लिए लेट नहीं होना चाहते थे। वो हमेशा कहते थे, “स्टूडेंट्स को इंतजार मत कराओ”। मैंने जल्दी से उनका माइक सेट किया और लेक्चर के बारे में स्डूडेंट्स को थोड़ी जानकारी दी और वापस आकर अपने कंप्यूटर को संभाल लिया। जब मैंने उनके माइक को सेट किया तो वे मेरी तरफ देखकर मुस्कराए और बोले, “Funny guy-क्या तुमने सही कर दिया।” कलाम ने जब Funny guy कहा तो उनकी बात के कई मतलब थे लेकिन ये मतलब आपकी सोच और उनकी टोन से ही समझे जा सकते थे। हो सकता है इसका एक मतलब यह हो कि तुमने सबकुछ सही किया है या ये कि तुमने कुछ गड़बड़ कर दी। कुल मिलाकर आप उनकी बात सुनकर उसका मतलब निकाल सकते थे- इससे यह अंदाजा भी लग जाता था कि उन्होंने कोई बात सामान्य तौर पर कही है या फिर खुश होकर वे कुछ कह रहे हैं। पिछले छह सालों में Funny guy शब्द तो मेरे लिए बहुत पहचाना सा हो गया था, हां सोमवार को कहा गया उनका Funny guy मेरे लिए आखिरी शब्द बन गया। जब उन्होंने मुझसे पूछा- Funny guy क्या तुम सही कर रहे हो। मैंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, यस। ये आखिरी शब्द थे। वो दो मिनट बोले और मैं उनके पीछे बैठे था। मैंने एक उनके द्वारा बोली गई एक लाइन सुनी-जिसमें कुछ शब्दों के बाद लंबा विराम (pause) था। मैंने उनकी तरफ देखा लेकिन वे गिर गए। हमने उन्हें उठाया। इतने में डॉक्टर भी कलाम की तरफ भागे। हम जो कर सकते थे, किया।
किस्सा : 5 हम अगले जन्म में फिर मिलेंगे....
मैं उन पलों को कभी नहीं भूल सकता जब उनकी आंखें लगभग बंद हुईं और उनका सिर मेरी गोद में था। उनका मुड़ा हुआ हाथ मेरी उंगलियों के बीच था। उनके चेहरे पर कोई हरकत नहीं थी और उनकी वो बोलने वाली इंटेलीजेंट आंखें भी लगभग स्थिर हो चुकी थीं। वे एक शब्द भी नहीं बोले और न उन्होंने दर्द की शिकायत की। चेहरे से केवल पर्पज जाहिर होता था। पांच मिनट में हम हॉस्पिटल पहुंच गए। अगले कुछ मिनट में यह भी तय हो गया कि मिसाइल मैन हमसे दूर जा चुका है। आखिरी बार मैंने उनके पैर छुए और कहा- अलविदा मेरे बुजुर्ग दोस्त मेरे ग्रांड मेंटर। मैं आपको अपने थॉट्स में याद रखूंगा- हम अगले जन्म में फिर मिलेंगे।
किस्सा : 6. उनका सवाल उन्हीं से..........लेकिन चुप मुझे हो जाना पड़ा
पीछे मुड़कर देखता हूं तो कई बातें याद आती हैं। वो अकसर मुझसे कहते थे, “तुम यंग हो-तय करो कि दुनिया तुम कैसे याद रखेगी।” उनके इस सवाल का जवाब देने के लिए मैं अकसर कोई ऐसा आन्सर खोजा करता था जो उन्हें इम्प्रेस कर सके। लेकिन जब ऐसा नहीं कर सका तो मैंने उनका सवाल उनसे ही पूछ लिया। मैंने कहा, “पहले आप बताइए कि आप किस तरह याद किया जाना पसंद करेंगे। प्रेसिडेंट, साइंटिस्ट, राइटर, मिसाइल मैन, इंडिया 2020, टारगेट 3 बिलियन या कुछ और...।” मुझे लगा कि मैंने ऑप्शंस देकर उनका काम आसान कर दिया है। लेकिन उनके जवाब ने उलटा मुझे ही चुप करा दिया। जानते हैं उन्होंने क्या जवाब दिया। उन्होंने कहा, “टीचर- मैं टीचर के रूप में याद किया जाना पसंद करूंगा।”
किस्सा : 7 दो काम बुजुर्ग न करें....और उन्होंने भी नहीं किए
कुछ हफ्तों पहले हम उनके मिसाइल टाइम के दोस्तों की बात कर रहे थे। तब उन्होंने कहा, “बच्चों को अपने पैरेंट्स की केयर करनी चाहिए। लेकिन ये बहुत दुख की बात है कि ऐसा हो नहीं रहा है। बड़ों को भी दो चीजें जरूर करनी चाहिए। मरने से पहले पैसा नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि इससे फैमिली में झगड़े होते हैं। दूसरी- मौत काम करते-करते ही हो जाना चाहिए। यह तो आर्शीवाद ही है कि आपकी काम करते-करते ही मौत हो जाए। गुडबाय का टाइम हमेशा कम और बहुत कम होना चाहिए।”
किस्सा : 8 जो कहा वो खुद भी किया......मैं मिस करूंगा उन्हें तब जब.........
आज जब मैं पीछे मुढ़कर देखता हूं तो महसूस होता है कि वो अपनी फाइनल जर्नी पर चले गए और वो करते-करते ही चले गए जिसके लिए वे चाहते थे कि लोग उन्हें याद रखें यानी टीचर के रूप में। काम ही तो करते-करते चले गए वो- हम सब को छोड़कर। जैसा मैंने ऊपर कहा कि वो खाली हाथ जाने की सलाह देते थे, खुद भी खाली हाथ ही गए। उनके खाते में केवल करोड़ों विशेज और प्यार है। वो जिंदगी के आखिरी पलों में भी सक्सेफुल ही रहे।
मैं उनके साथ किए गए लंच और डिनर को हमेशा मिस करूंगा, मैं मिस करूंगा कि मैंने उनके साथ क्यूरोसिटी को शांत करने के तरीके कैसे सीखे। मैं ये भी मिस करूंगा कि जिंदगी के थॉट्स को हकीकत में कैसे बदला जा सकता है। मैं मिस करूंगा कि कैसे हम फ्लाइट पकड़ने के लिए कोशिश करते थे और कैसे उस दौरान बहस करते थे।
और चलते-चलते...

कलाम सर, आपने मुझे असंभव को भी साकार करने के सपने दिए। सपनों को साकार करने के लिए कोई समझौता न करने और खुद पर भरोसा रखने का तरीका सिखाया। वो चले गए लेकिन उनका मिशन जिंदा रहेगा। आप अमर रहें कलाम सर।

नई दिल्‍ली. बिहार सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए राज्य के किशनंगज एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी का नाम अब डॉ कलाम एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी कर दिया गया है। वहीं, कलाम के करीबी लोगों ने फैसला किया है कि कलाम का टि्वटर अकाउंट पहले की तरह ही एक्टिव रहेगा। बस उसका नाम बदलकर In memory of Dr Kalam कर दिया गया है।
कलाम की सोच को आगे बढ़ाएगा उनका टि्वटर अकाउंट 
कलाम के करीबी सृजन पाल सिंह ने एक ट्वीट में लिखा, ''कलाम के अमर हो चुकी यादों को समर्पित। उनका यह अकाउंट अब उनके विचारों, शिक्षाओं और मिशन को जाहिर करेगा। मिस यू सर।'' सिंह अब उनके टि्वटर अकाउंट के एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम करेंगे। अकाउंट के जरिए कलाम की स्पीच और उनकी किताब विंग्स ऑफ फायर, इंडिया 2020 और इग्नाइटेड माइंड्स के अंशों को शेयर करेंगे।

मौत से एक दिन पहले घरवालों को किया था फोन 
पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी मौत से एक दिन पहले शिलॉन्ग से अपने परिवार को फोन किया था। उन्होंने अपने घरवालों से 99 साल के भाई मोहम्मद मुथू मीरा लीबाई मरायकर का हालचाल जाना था। कलाम के परपोते सलीम ने बताया कि उनका फोन 26 जुलाई की शाम को आया था। उन्होंने बताया था कि शिलॉन्ग में काफी ठंड है। शिलॉन्ग में ही कलाम ने आखिरी सांसे ली थीं। पूर्व राष्‍ट्रपति कलाम 83 साल की उम्र में भी एकदम एक्टिव थे। जीवन में सादगी का सिद्धांत भी उन्‍होंने अंतिम वक्‍त तक निभाया। सोमवार को अंतिम सफर पर भी वह गुवाहाटी से शिलांग कार में गए। पहाड़ी रास्‍तों पर 110 किलोमीटर का यह सफर उन्‍होंने दोपहर 2.30 बजे शुरू किया था और शाम 5.45 बजे वह‍ शिलांग में आईआईएम के गेस्‍ट हाउस पहुंचे थे। (डॉ. कलाम के आखिरी शब्‍द क्‍या थे, यहां पढ़ें)

शव दफनाने के लिए जमीन की तलाश पूरी 
कलाम को उनके गृहनगर रामेश्वरम में ही सुपुर्द ए खाक किया जाएग। इसके लिए स्थानीय अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के करीब स्थित एक मस्जिद के करीब की जगह का इंस्पेक्शन किया। कलाम के चचेरे भाई कासिम मोहम्मद ने बताया कि रामेश्वर में उनकी याद में एक मेमोरियल भी बनाया जाएगा।

रामेश्वर में दुकानें बंद, मछुआरों ने कामकाज रोका 
कलाम की याद में रामेश्वरम की सभी दुकानों को मंगलवार को बंद रखा गया। मछुआरों ने एलान किया कि वे अगले तीन दिन तक समुद्र में मछली पकड़ने नहीं जाएंगे।
‘दोपहर तीन बजे हम दिल्ली से गुवाहाटी पहुंचे। वहां से कार से शिलांग के लिए निकले। ढाई घंटे लगे पहुंचने में। आमतौर पर कलाम कार में सो जाया करते थे। लेकिन इस बार बातें करते रहे। शिलांग में खाना खाकर हम आईआईएम पहुंचे। वे लेक्चर देने स्टेज पर गए। मैं पीछे ही खड़ा था। उन्होंने मुझसे पूछा- ऑल फिट? मैंने कहा- जी साहब।

दो सेंटेंस ही बोले होंगे कि गिर पड़े। मैंने ही उन्हें बांहों में उठाया। उन्हें हॉस्पिटल ले आए। पर बचा नहीं सके। साहब हमेशा कहते थे कि मैं टीचर के रूप में ही याद किया जाना चाहता हूं। और पढ़ाते-पढ़ाते ही चले गए। उन्होंने आखिरी लाइन कही थी कि धरती को जीने लायक कैसे बनाया जाए? शिलांग के रास्ते में कह रहे थे कि संसद का डेडलॉक कैसे खत्म किया जाए? फिर कहने लगे कि आईआईएम के स्टूडेंट्स से ही पूछूंगा। -सृजन पाल सिंह ( कलाम के सहयोगी)

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Wednesday, July 22, 2015

पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि - !!!!!!!!

REFERENCE ---------

http://www.transliteral.org/QnA/271/%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%87


भगवानधन-दौलत के भूखे नहीं हैं वह तो भक्त की भक्ति-भव के भूखे हैं।

 वह तो जगत के पालनकर्ता हैं। मनुष्य को सदैव उनका ध्यान करते रहना चाहिए। 

स्वछ और आनंदायक स्थान ही भक्ति के लिये काफि है! मंदिर कहीं भी हो, जहां भक्ती हो, वही भगवान है! 
  1. सभी प्रकार की पूजा में चावल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो अखंडित (पूरे चावल) हो यानी टूटे हुए ना हो। चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला करना बहुत शुभ माना गया है। इसके लिए थोड़े से पानी में हल्दी घोल लें और उस घोल में चावल को डूबोकर पीला किया जा सकता है।
  2. पूजन में पान का पत्ता भी रखना चाहिए। ध्यान रखें पान के पत्ते के साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए। पूरा बना हुआ पान चढ़ाएंगे तो श्रेष्ठ रहेगा।
  3. पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
  4. किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन (आमंत्रित करना) करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, पुष्प (फूल), प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
  5. देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से अवश्य धो लेना चाहिए।
  6. भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग का रेशमी कपड़ा चढ़ाना चाहिए। माता दुर्गा, सूर्यदेव व श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए लाल रंग का, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सफेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए।
  7. किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवता, कुल देवी, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना भी आवश्यक है। इन सभी का पूजन भी करना चाहिए।
  8. पूजन में हम जिस आसन पर बैठते हैं, उसे पैरों से इधर-उधर खिसकाना नहीं चाहिए। आसन को हाथों से ही खिसकाना चाहिए।
  9. यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे।
  10. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है।
  11. तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुन: भगवान को अर्पित किया जा सकता है।
  12. दीपक हमेशा भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए। कभी-कभी भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर इधर-उधर लगा दिया जाता है, जबकि यह सही नहीं है।
  13. घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।
  14. पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।
  15. शिवजी को बिल्व पत्र अवश्य चढ़ाएं और किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए अपनी इच्छा के अनुसार भगवान को दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए, दान करना चाहिए। दक्षिणा अर्पित करते समय अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। दोषों को जल्दी से जल्दी छोड़ने पर मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी।
  16. भगवान सूर्य की 7, श्रीगणेश की 3, विष्णुजी की 4 और शिवजी की 3 परिक्रमा करनी चाहिए।
  17.  घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इन सभी की पूरी जानकारी किसी ब्राह्मण (पंडित) से प्राप्त की जा सकती है। विशेष पूजन पंडित की मदद से ही करवाने चाहिए, ताकि पूजा विधिवत हो सके।
  18. घर में पूजन स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या भारी चीज न रखें।
  19. भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही शंख से जल चढ़ाना चाहिए।
  20. पूजन स्थल पर पवित्रता का ध्यान रखें। चप्पल पहनकर कोई मंदिर तक नहीं जाना चाहिए। चमड़े का बेल्ट या पर्स अपने पास रखकर पूजा न करें। पूजन स्थल पर कचरा इत्यादि न जमा हो पाए।


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Tuesday, July 21, 2015

वैदिक समय का अद्भुत विवरण



मनुष्यपरम अणू
3,592,147,500,000
.0
मनुष्यअणू
1,796,073,750,000
.0
मनुष्यत्रुसरेणू
598,691,250,000
.0
मनुष्यत्रुटी
199,563,750,000
.0
मनुष्यबोध
665,212,500
.0
मनुष्यलव
221,737,500
.0
मनुष्यनिमेष
73,912,500
.0
मनुष्यक्षण
24,637,500
.0
मनुष्यप्राण
7,884,000
.0
मनुष्यकाष्ठ
4,927,500
.0
मनुष्यविनाडी
1,314,000
.0
मनुष्यलघु
328,500
.0
मनुष्यकला
328,500
.0
मनुष्यघटीका
21,900
.0
मनुष्यमुहूर्त
10,950
.0
मनुष्यप्रहर
2,920
.0
मनुष्यदिन
730
.0
मनुष्यरात्र
730
.0
मनुष्यअहोरात्र
365
.0
GregorianDay
365
.0
GregorianMonth
12
.0
GregorianYear
1
.0
मनुष्यसप्ताह
52
.1428571428571
मनुष्यपक्ष
24
.3333333333333
मनुष्यमास
12
.1666666666667
मनुष्यऋतु
6
.08333333333333
मनुष्यअयन
2
.02777777777778
मनुष्यवर्ष
1
.01388888888889
देवदिन
2
.02777777777778
देवरात्र
2
.02777777777778
देवअहोरात्र
1
.01388888888889
देववर्ष
0
.00281635802469136
पितृदिन
24
.3333333333333
पितृरात्र
24
.3333333333333
पितृअहोरात्र
12
.1666666666667
पितृमास
0
.405555555555556
पितृवर्ष
0
.00281635802469136
सप्तर्षीसंवत्सर
0
.000334616795012835
क्रौंचसंवत्सर
0
.000111538931670945
युगसत्ययुग
0
.00000070408950617284
युगत्रेतायुग
0
.000000938786008230453
युगद्वापारयुग
0
.00140817901234568
युगकलियुग
0
.00000281635802469136
युगचौकड़ी - महायुग
0
.000000234696502057613
ब्रह्मामनवंतर
0
.00000000330558453602272
ब्रह्माकल्प
0
.00000000023611318114448
ब्रह्मादिन
0
.00000000023611318114448
ब्रह्मारात्र
0
.00000000023611318114448
ब्रह्माअहोरात्र
0
.00000000011805659057224
ब्रह्मामास
0
.00000000000393521968574133
ब्रह्मावर्ष
0
.000000000000327934973811778
विष्णुदिन
0
.00000000000000327934973811778
विष्णुरात्र
0
.00000000000000327934973811778
विष्णुअहोरात्र
0
.00000000000000163967486905889
विष्णुवर्ष
0
.0000000000000000045546524140524697
शंकरदिन
0
.0000000000000000000151821747135082
शंकररात्र
0
.0000000000000000000151821747135082
शंकरअहोरात्र
0
.00000000000000000000759108735675412

Wednesday, June 24, 2015

रावण रचित "शिव तांडव स्तोत्र"


हर किसी के मन में एक ख्याल हमेशा आता है कि क्या कोई ऐसा मंत्र है जो आपको सारा वैभव और सिद्धियां दे सकता है। मंत्रों में बड़ी शक्ति होती है, एक मंत्र का सही जाप आपकी जिंदगी बदल सकता है। ऐसा ही एक स्तोत्र है शिवतांडव स्तोत्र, जिसके जरिए आप न केवल धन-संपत्ति पा सकते हैं बल्कि आपका व्यक्तित्व भी निखर जाएगा। शिव तांडव स्तोत्र रावण द्वारा रचा गया है, इसकी कठिन शब्दावली और अद्वितीय वाक्य रचना इसे अन्य मंत्रों से अलग बनाती है। आपके जीवन में किसी भी सिद्धि की महत्वाकांक्षा हो इस स्तोत्र के जाप से आपको आसानी से प्राप्त हो जाएगी। सबसे ज्यादा फायदा आपकी वाक सिद्धि को होगा, अगर अभी तक आप दोस्तों में या किसी ग्रुप में बोलते हुए अटकते हैं तो यह समस्या इस स्तोत्र के पाठ से दूर हो जाएगी। इसकी शब्द रचना के कारण व्यक्ति का उच्चरण साफ हो जाता है। दूसरा इस मंत्र से नृत्य, चित्रकला, लेखन, युद्धकला, समाधि, ध्यान आदि कार्यो में भी सिद्धि मिलती है। इस स्तोत्र का जो भी नित्य पाठ करता है उसके लिए सारे राजसी वैभव और अक्षय लक्ष्मी भी सुलभ होती है।

शिव ताण्डव स्तोत्र ( संस्कृत:शिवताण्डवस्तोत्रम् ) महान विद्वान एवं परम शिवभक्त लंकाधिपति रावण द्वारा विरचित भगवान शिव का स्तोत्र है। 

मान्यता है कि रावण ने कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और जब पूरे पर्वत को ही लंका ले चलने को उद्यत हुआ तो भोले बाबा ने अपने अंगूठे से तनिक सा जो दबाया तो कैलाश फिर जहां था वहीं अवस्थित हो गया। शिव के अनन्य भक्त रावण का हाथ दब गया और वह आर्तनाद कर उठा - "शंकर शंकर" - अर्थात क्षमा करिए, क्षमा करिए और स्तुति करने लग गया; जो कालांतर में शिव तांडव स्त्रोत्र कहलाया।

॥ अथ रावण कृत  शिव तांडव स्तोत्र ॥

जटाटवीग लज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌। 

डमड्डमड्डमड्डम न्निनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

सघन जटामंडल रूप वन से प्रवाहित होकर श्री गंगाजी की धाराएँ जिन शिवजी के पवित्र कंठ प्रदेश को प्रक्षालित (धोती) करती हैं, और जिनके गले में लंबे-लंबे बड़े-बड़े सर्पों की मालाएँ लटक रही हैं तथा जो शिवजी डमरू को डम-डम बजाकर प्रचंड तांडव नृत्य करते हैं, वे शिवजी हमारा कल्याण करें।

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।

धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

अति अम्भीर कटाहरूप जटाओं में अतिवेग से विलासपूर्वक भ्रमण करती हुई देवनदी गंगाजी की चंचल लहरें जिन शिवजी के शीश पर लहरा रही हैं तथा जिनके मस्तक में अग्नि की प्रचंड ज्वालाएँ धधक कर प्रज्वलित हो रही हैं, ऐसे बाल चंद्रमा से विभूषित मस्तक वाले शिवजी में मेरा अनुराग (प्रेम) प्रतिक्षण बढ़ता रहे। 

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।

कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

पर्वतराजसुता के विलासमय रमणीय कटाक्षों से परम आनंदित चित्त वाले (माहेश्वर) तथा जिनकी कृपादृष्टि से भक्तों की बड़ी से बड़ी विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं, ऐसे (दिशा ही हैं वस्त्र जिसके) दिगम्बर शिवजी की आराधना में मेरा चित्त कब आनंदित होगा।

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।

मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

जटाओं में लिपटे सर्प के फण के मणियों के प्रकाशमान पीले प्रभा-समूह रूप केसर कांति से दिशा बंधुओं के मुखमंडल को चमकाने वाले, मतवाले, गजासुर के चर्मरूप उपरने से विभूषित, प्राणियों की रक्षा करने वाले शिवजी में मेरा मन विनोद को प्राप्त हो।

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।

भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

इंद्रादि समस्त देवताओं के सिर से सुसज्जित पुष्पों की धूलिराशि से धूसरित पादपृष्ठ वाले सर्पराजों की मालाओं से विभूषित जटा वाले प्रभु हमें चिरकाल के लिए सम्पदा दें।

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।

सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

इंद्रादि देवताओं का गर्व नाश करते हुए जिन शिवजी ने अपने विशाल मस्तक की अग्नि ज्वाला से कामदेव को भस्म कर दिया, वे अमृत किरणों वाले चंद्रमा की कांति तथा गंगाजी से सुशोभित जटा वाले, तेज रूप नर मुंडधारी शिवजीहमको अक्षय सम्पत्ति दें।

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।

धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

जलती हुई अपने मस्तक की भयंकर ज्वाला से प्रचंड कामदेव को भस्म करने वाले तथा पर्वत राजसुता के स्तन के अग्रभाग पर विविध भांति की चित्रकारी करने में अति चतुर त्रिलोचन में मेरी प्रीति अटल हो।

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।

निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

नवीन मेघों की घटाओं से परिपूर्ण अमावस्याओं की रात्रि के घने अंधकार की तरह अति गूढ़ कंठ वाले, देव नदी गंगा को धारण करने वाले, जगचर्म से सुशोभित, बालचंद्र की कलाओं के बोझ से विनम, जगत के बोझ को धारण करने वाले शिवजी हमको सब प्रकार की सम्पत्ति दें।


प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌

स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

फूले हुए नीलकमल की फैली हुई सुंदर श्याम प्रभा से विभूषित कंठ की शोभा से उद्भासित कंधे वाले, कामदेव तथा त्रिपुरासुर के विनाशक, संसार के दुखों के काटने वाले, दक्षयज्ञविध्वंसक, गजासुरहंता, अंधकारसुरनाशक और मृत्यु के नष्ट करने वाले श्री शिवजी का मैं भजन करता हूँ।

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।

स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

कल्याणमय, नाश न होने वाली समस्त कलाओं की कलियों से बहते हुए रस की मधुरता का आस्वादन करने में भ्रमररूप, कामदेव को भस्म करने वाले, त्रिपुरासुर, विनाशक, संसार दुःखहारी, दक्षयज्ञविध्वंसक, गजासुर तथा अंधकासुर को मारनेवाले और यमराज के भी यमराज श्री शिवजी का मैं भजन करता हूँ।

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-

धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

अत्यंत शीघ्र वेगपूर्वक भ्रमण करते हुए सर्पों के फुफकार छोड़ने से क्रमशः ललाट में बढ़ी हुई प्रचंड अग्नि वाले मृदंग की धिम-धिम मंगलकारी उधा ध्वनि के क्रमारोह से चंड तांडव नृत्य में लीन होने वाले शिवजी सब भाँति से सुशोभित हो रहे हैं।

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।

तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कड़े पत्थर और कोमल विचित्र शय्या में सर्प और मोतियों की मालाओं में मिट्टी के टुकड़ों और बहुमूल्य रत्नों में, शत्रु और मित्र में, तिनके और कमललोचननियों में, प्रजा और महाराजाधिकराजाओं के समान दृष्टि रखते हुए कब मैं शिवजी का भजन करूँगा।

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌ ।

विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

कब मैं श्री गंगाजी के कछारकुंज में निवास करता हुआ, निष्कपटी होकर सिर पर अंजलि धारण किए हुए चंचल नेत्रों वाली ललनाओं में परम सुंदरी पार्वतीजी के मस्तक में अंकित शिव मंत्र उच्चारण करते हुए परम सुख को प्राप्त करूँगा।

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।

तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

देवांगनाओं के सिर में गूँथे पुष्पों की मालाओं के झड़ते हुए सुगंधमय पराग से मनोहर, परम शोभा के धाम महादेवजी के अंगों की सुंदरताएँ परमानंदयुक्त हमारेमन की प्रसन्नता को सर्वदा बढ़ाती रहें।

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।

विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

प्रचंड बड़वानल की भाँति पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अणिमादिक अष्ट महासिद्धियों तथा चंचल नेत्रों वाली देवकन्याओं से शिव विवाह समय में गान की गई मंगलध्वनि सब मंत्रों में परमश्रेष्ठ शिव मंत्र से पूरित, सांसारिक दुःखों को नष्ट कर विजय पाएँ।

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌ ।

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

इस परम उत्तम शिवतांडव श्लोक को नित्य प्रति मुक्तकंठ सेपढ़ने से या श्रवण करने से संतति वगैरह से पूर्ण हरि और गुरु मेंभक्ति बनी रहती है। जिसकी दूसरी गति नहीं होती शिव की ही शरण में रहता है।

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।

तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

शिव पूजा के अंत में इस रावणकृत शिव तांडव स्तोत्र का प्रदोष समय में गान करने से या पढ़ने से लक्ष्मी स्थिर रहती है। रथ गज-घोड़े से सर्वदा युक्त रहता है।

॥ इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥


श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन, कंज-मुख, कर-कंज, पद-कंजारुणम्॥

भावार्थ : हे मन! कृपालु श्री रामचंद्र जी का भजन कर... वह संसार के जन्म-मरण रूपी दारुण भय को दूर करने वाले हैं... उनके नेत्र नव-विकसित कमल के समान हैं, तथा मुख, हाथ और चरण भी लाल कमल के सदृश हैं...

कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील-नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥

भावार्थ : उनके सौंदर्य की छटा अगणित कामदेवों से बढ़कर है, उनके शरीर का नवीन-नील-सजल मेघ समान सुंदर वर्ण (रंग) है, उनका पीताम्बर शरीर में मानो बिजली के समान चमक रहा है, तथा ऐसे पावन रूप जानकीपति श्री राम जी को मैं नमस्कार करता हूं...

भजु दीनबंधु दिनेश दानव, दैत्य-वंश-निकन्दनम्।
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथ-नंदनम्॥

भावार्थ : हे मन! दीनों के बंधु, सूर्य के समान तेजस्वी, दानव और दैत्यों के वंश का समूल नाश करने वाले, आनन्द-कन्द, कोशल-देशरूपी आकाश में निर्मल चन्द्रमा के समान, दशरथ-नन्दन श्री राम जी का भजन कर...




सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप धर, संग्रामजित खरदूषणम्॥

भावार्थ : जिनके मस्तक पर रत्नजटित मुकुट, कानों में कुण्डल, भाल पर सुंदर तिलक और प्रत्येक अंग में सुंदर आभूषण सुशोभित हो रहे हैं, जिनकी भुजाएं घुटनों तक लम्बी हैं, जो धनुष-बाण लिए हुए हैं, जिन्होंने संग्राम में खर और दूषण को भी जीत लिया है...

इति वदति तुलसीदास शंकर, शेष-मुनि-मन-रंजनम्।
मम हृदय-कंज-निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥

भावार्थ : जो शिव, शेष और मुनियों के मन को प्रसन्न करने वाले और काम, क्रोध, लोभ आदि शत्रुओं का नाश करने वाले हैं... तुलसीदास प्रार्थना करते हैं कि वह श्री रघुनाथ जी मेरे हृदय-कमल में सदा निवास करें...

मनु जाहिं राचेहु मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।
करुणा निधान सुजान सील सनेह जानत रावरो॥

भावार्थ : गौरी-पूजन में लीन जानकी (सीता जी) पर गौरी जी प्रसन्न हो जाती हैं और वर देते हुए कहती हैं - हे सीता! जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वह स्वभाव से ही सुंदर और सांवला वर (श्री रामचन्द्र) तुम्हें मिलेगा... वह दया के सागर और सुजान (सर्वज्ञ) हैं, तुम्हारे शील और स्नेह को जानते हैं...

एहि भांति गौरि असीस सुनि सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

भावार्थ : इस प्रकार गौरी जी का आशीर्वाद सुनकर जानकी जी सहित समस्त सखियां अत्यन्त हर्षित हो उठती हैं... तुलसीदास जी कहते हैं कि तब सीता जी माता भवानी को बार-बार पूजकर प्रसन्न मन से राजमहल को लौट चलीं...

सोरठा: जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥

भावार्थ : गौरी जी को अपने अनुकूल जानकर सीता जी को जो हर्ष हुआ, वह अवर्णनीय है... सुंदर मंगलों के मूल उनके बायें अंग फड़कने लगे...