Tuesday, October 23, 2012

कन्या रूप पूजनीय क्यों?


GOOD ARTICLE BY
PT. SHREE ASHU BAHUGUNA 
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हमारे धर्मग्रन्थों में कन्या-पूजन को नवरात्र-व्रतका अनिवार्य अंग बताया गया है। छोटी बालिकाओं में देवी दुर्गा 


का रूप देखने के कारण श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।



हिंदु धर्म में दो वर्ष की कन्या को कुमारी 
कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके पूजन से दुख और दरिद्रता समाप्त हो जाती है।

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तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति 
मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और स
ंपूर्ण परिवार का कल्याण होता है।

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चार वर्ष की कन्या कल्याणी 
के नाम से संबोधित की जाती है। कल्याणी की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है

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पांच वर्ष की कन्या रोहिणी 
कही जाती है। रोहिणी के पूजन से व्यक्ति रोग-मुक्त होता है।

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छ:वर्ष की कन्या कालिका 
की अर्चना से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है।

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सात वर्ष की कन्या चण्डिका
के पूजन से ऐश्वर्य मिलता है।

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आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी 
की पूजा से वाद-विवाद में विजय तथा लोकप्रियता प्राप्त होती है।

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नौ वर्ष की कन्या दुर्गा 
की अर्चना से शत्रु का संहार होता है तथा असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं।

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दस वर्ष की कन्या सुभद्रा 
कही जाती है। सुभद्रा के पूजन से मनोरथ पूर्ण होता है तथा लोक-परलोक में सब सुख प्राप्त होते हैं।.....





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Monday, October 22, 2012

विभिन्न प्रकार से सफलता प्राप्ति के उपाय

GOOD ARTICLE BY
VEEJAY ASTRO
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शत्रु शमन के लिए :

साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चावल के 40 दाने मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर से नीबू 

निचोड़ दें। नीबू निचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहें, उसका शमन होगा और वह आपके विरुद्ध कोई 

कदमनहींउठाएगा।



अकारण परेशान करने वाले व्यक्ति से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए :

यदि कोई व्यक्ति बगैर किसी कारण के परेशान कर रहा हो, तो शौच क्रिया काल में शौचालय में बैठे-बैठे वहीं के पानी से उस व्यक्ति का नाम लिखें और बाहर निकलने से पूर्व जहां पानी से नाम लिखा था, उस स्थान पर अप बाएं पैर से तीन बार ठोकर मारें। ध्यान रहे, यहप्रयोग स्वार्थवश न करें, अन्यथा हानि हो सकती है।

नजर उतारने के प्राचीन उपाय

1. नमक, राई, राल, लहसुन, प्याज के सूखे छिलके व सूखी मिर्च अंगारे पर डालकर उस आग को रोगी के ऊपर सात बार घुमाने से बुरी नजर का दोष मिटता है।

2. शनिवार के दिन हनुमान मंदिर में जाकर प्रेमपूर्वक हनुमान जी की आराधना कर उनके कंधे पर से सिंदूर लाकर नजर लगे हुए व्यक्ति के माथे पर लगाने से बुरी नजर का प्रभाव कम होता है।

3. खाने के समय भी किसी व्यक्ति को नजर लग जाती है। ऐसे समय इमली की तीन छोटी डालियों को लेकर आग में जलाकर नजर लगे व्यक्ति के माथे पर से सात बार घुमाकर पानी में बुझा देते हैं और उस पानी को रोगी को पिलाने से नजर दोष दूर होता है।

4. कई बार हम देखते हैं, भोजन में नजर लग जाती है। तब तैयार भोजन में से थोड़ा-थोड़ा एक पत्ते पर लेकर उस पर गुलाब छिड़ककर रास्ते में रख दे। फिर बाद में सभी खाना खाएँ। नजर उतर जाएगी।

5. नजर लगे व्यक्ति को पान में गुलाब की सात पंखुड़ियाँ रखकर खिलाए। नजर लगा हुआ व्यक्ति इष्ट देव का नाम लेकर पान खाए। बुरी नजर का प्रभाव दूर हो जाएगा।

6. लाल मिर्च, अजवाइन और पीली सरसों को मिट्‍टी के एक छोटे बर्तन में आग लेकर जलाएँ। ‍िफर उसकी धूप नजर लगे बच्चे को दें। किसी प्रकार की नजर हो ठीक हो जाएगी।


नज़र बाधा

1. आप अपने नए मकान को बुरी नजर से बचाना चाहते हैं तो मुख्य द्वार की चौखट पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधकर लटकाने से समस्त ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

2. यदि आपने कोई नया वाहन खरीदा है और आप इस बात से परेशान हैं कि कुछ न कुछ रोज वाहन में गड़बड़ी हो जाती है। यदि गड़बड़ी नहीं होती तो दुर्घटना में चोट-चपेट लग जाती है औरबेकार के खर्च से सारी अर्थ-व्यवस्था चौपट हो जाती है। अपने वाहन पर काले धागे से पीली कौड़ी बांधने से आप इस बुरी नजर से बच सकेंगे, करके परेशानी से मुक्त हो जाएं।

3. यदि आपके घर पर रोज कोई न कोई आपदा आ रही है। आप इस बात को लेकर परेशान हैं कि कहीं किसी ने कुछ कर तो नहीं दिया। ऐसे में आपको चाहिए कि एक नारियल को काले कपड़े मेंसिलकर घर के बाहर लटका दें।

4. मिर्च, राई व नमक को पीड़ित व्यक्ति के सिर से वार कर आग में जला दें। चंद्रमा जब राहु से पीड़ित होता है तब नजर लगती है। मिर्च मंगल का, राई शनि का और नमक राहु का प्रतीक है। इन तीनों को आग (मंगल का प्रतीक) में डालने से नजर दोष दूर हो जाता है। यदि इन तीनों को जलाने पर तीखी गंध न आए तो नजर दोष समझना चाहिए। यदि आए तो अन्य उपाय करने चाहिए।

टोटका तीन-यदि आपके बच्चे को नजर लग गई है और हर वक्त परेशान व बीमार रहता है तो लाल साबुत मिर्च को बच्चे के ऊपर से तीन बार वार कर जलती आग में डालने से नजर उतर जाएगी और मिर्च का धचका भी नहीं लगेगा।

5. यदि कोई व्यक्ति बुरी नजर से परेशान है तो कि शनिवार के दिन कच्चा दूध उसके ऊपर से सात बार वारकर कुत्ते को पिला देने से बुरी नजर का प्रभाव दूर हो जाता है।

6. यदि कोई व्यक्ति बुरी नजर से परेशान है तो कि मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर उनके कन्धे से सिन्दुर लेकर नजर लगे व्यक्ति के माथे पर यह सोचकर तिलक कर दें कि यह नजर दोष से मुक्त हो गया है।

दिमाग से चिन्ता हटाने का टोटका

अधिकतर पारिवारिक कारणों से दिमाग बहुत ही उत्तेजना में आजाता है,परिवार की किसी समस्या से या लेन देन से,अथवा किसी रिस्तेनाते को लेकर दिमाग एक दम उद्वेलित होने लगता है,ऐसा लगने लगता है कि दिमाग फ़ट पडेगा,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जैसे ही टेंसन हो एक लोटे में या जग में पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहर सडक पर फ़ेंक दीजिये,फ़ौरन आराम मिल जायेगा।

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7. यदि आपके बच्चे को बार-बार नजर लग जाती है तो आपको चाहिए कि आप उसके गले में रीठे का एक फल काले धागे में उसके गले में पहना दें।

8. यदि आप नजर दोष से मुक्त होना चाहते हैं तो सूती कोरे कपड़े को सात बार वारकर सीधी टांग के नीचे से निकालकर आग में झोंक दें। यदि नजर होगी तो कपड़ा जल जाएगा व जलने की बदबू भी नहीं आएगी। यह प्रयोग बुधवार एवं शनिवार को ही कर सकते हैं।

9. टोटका नौ-यदि कोई बच्चा नजर दोष से बीमार रहता है और उसका समस्त विकास रुक गया है तो फिटकरी एवं सरसों को बच्चे पर से सात बार वारकर चूल्हे पर झोंक देने से नजर उतर जाती है। यदि यह सुबह, दोपहर एवं सायं तीनों समय करें तो एक ही दिन में नजर दोष दूर हो जाता है।

घर से पराशक्तियों को हटाने का टोटका

एक कांच के गिलास में पानी में नमक मिलाकर घर के नैऋत्य के कोने में रख दीजिये,और उस बल्ब के पीछे लाल रंग का एक बल्व लगा दीजिये,जब भी पानी सूख जाये तो उस गिलास को फ़िर से साफ़ करने के बाद नमक मिलाकर पानी भर दीजिये।

बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :

1-एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !

2- प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !

3- यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !

4- सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।

ससुराल में सुखी रहने के लिए :

1- कन्या अपने हाथ से हल्दी की 7 साबुत गांठें, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की तरफ फेंके, ससुराल में सुरक्षित और सुखी रहेगी।

2- सवा पाव मेहंदी के तीन पैकेट (लगभग सौ ग्राम प्रति पैकेट) बनाएं और तीनों पैकेट लेकर काली मंदिर या शस्त्र धारण किए हुए किसी देवी की मूर्ति वाले मंदिर में जाएं। वहां दक्षिणा, पत्र, पुष्प, फल, मिठाई, सिंदूर तथा वस्त्र के साथ मेहंदी के उक्त तीनों पैकेट चढ़ा दें। फिर भगवती से कष्ट निवारण की प्रार्थना करें और एक फल तथा मेहंदी के दो पैकेट वापस लेकर कुछ धन के साथ किसी भिखारिन या अपने घर के आसपास सफाई करने वाली को दें। फिर उससे मेहंदी का एक पैकेट वापस ले लें और उसे घोलकर पीड़ित महिला के हाथों एवं पैरों में लगा दें। पीड़िता की पीड़ा मेहंदी के रंग उतरने के साथ-साथ धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।

पति-पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने हेतु :

1. रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर की २ टिकियां रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें।

पति को वश में करने के लिए :

2- शनिवार की रात्रि में ७ लौंग लेकर उस पर २१ बार जिस व्यक्ति को वश में करना हो उसका नाम लेकर फूंक मारें और अगले रविवार को इनको आग में जला दें। यह प्रयोग लगातार ७ बार करने से अभीष्ट व्यक्ति का वशीकरण होता है।

3- अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं। तो यह प्रयोग आपके लिए बहुत कारगर है, प्रत्येक रविवार को अपने घर तथा शयनकक्ष में गूगल की धूनी दें। धूनी करने से पहले उस स्त्री का नाम लें और यह कामना करें कि आपके पति उसके चक्कर से शीघ्र ही छूट जाएं। श्रद्धा-विश्वास के साथ करने से निश्चिय ही आपको लाभ मिलेगा।

घर की कलह को समाप्त करने का उपाय

रोजाना सुबह जागकर अपने स्वर को देखना चाहिये,नाक के बायें स्वर से जागने पर फ़ौरन बिस्तर छोड कर अपने काम में लग जाना चाहिये,अगर नाक से दाहिना स्वर चल रहा है तो दाहिनी तरफ़ बगल के नीचे तकिया लगाकर दुबारा से सो जाना चाहिये,कुछ समय में बायां स्वर चलने लगेगा,सही तरीके से चलने पर बिस्तर छोड देना चाहिये।



परिवार में शांति बनाए रखने के लिए :

बुधवार को मिट्टी के बने एक शेर को उसके गले में लाल चुन्नी बांधकर और लाल टीका लगाकर माता के मंदिर में रखें और माता को अपने परिवार की सभी समस्याएं बताकर उनसे शांति बनाए रखने की विनती करें। यह क्रिया निष्ठापूर्वक करें, परिवार में शांति कायम होगी।

सफलता प्राप्ति के लिए :

1. किसी कार्य की सिद्धि के लिए जाते समय घर से निकलने से पूर्व ही अपने हाथ में रोटी ले लें। मार्ग में जहां भी कौए दिखलाई दें, वहां उस रोटी के टुकड़े कर के डाल दें और आगे बढ़ जाएं। इससे सफलता प्राप्त होती है।

2॰ किसी भी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय घर की देहली के बाहर, पूर्व दिशा की ओर, एक मुट्ठी घुघंची को रख कर अपना कार्य बोलते हुए, उस पर बलपूर्वक पैर रख कर, कार्य हेतु निकल जाएं, तो अवश्य ही कार्य में सफलता मिलती है।

3॰ अगर किसी काम से जाना हो, तो एक नींबू लें। उसपर 4 लौंग गाड़ दें तथा इस मंत्र का जाप करें : `ॐ श्री हनुमते नम:´। 21 बार जाप करने के बाद उसको साथ ले कर जाएं। काम में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

4 चुटकी भर हींग अपने ऊपर से वार कर उत्तर दिशा में फेंक दें। प्रात:काल तीन हरी इलायची को दाएँ हाथ में रखकर “श्रीं श्रीं´´ बोलें, उसे खा लें, फिर बाहर जाए¡

प्रातः सोकर उठने के बाद नियमित रूप से अपनी हथेलियों को ध्यानपूर्वक देखें और तीन बार चूमें। ऐसा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है। यह क्रिया शनिवार से शुरू करें।



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विशेष - लेखक के विचारों से इस ब्लॉगर का सहमत होना जरूरी नही है. पाठक इन प्रयोगों को स्व्यं कि जिम्मेवारी  पर कर सकते है.

एक मन्वन्तर की अवधि


GOOD ARTICLE BY
ASTROLOGER SHREE SURENDRA SINGH RAWAT 
ON FACE BOOK 

२ परमाणु ==> १ अणु
३ अणु ==> १ त्रसरैणु
३ त्रसरेण ==> १ त्रुटि
१०० त्रुटि ==> १ वेध
३ वेध ==> १ लव
३ लव ==> १ निमेष
३ निमेष ==> १ क्षण
५ क्षण ==> १ काष्ठा
३० काष्ठा ==> १ कला
१५ काष्ठा ==> १ लघु
१५ लघु ==> १ नाणिका
२ नाणिका ==> १ मुहूर्त
३० कला ==> १ मुहूर्त
३० मुहूर्त ==> १ दिनरात ( अहोरात )
७ दिनरात ==> १ सप्ताह
२ सप्ताह ==> १ पक्ष
२ पक्ष ==> १ मास
२ मास ==> १ ऋतु
३ ऋतु ==> १ अयन ( ६ माह )
२ अयन ==> १ वर्ष
कलियुग की अवधि ==> ४,३२,००० वर्ष
द्वापरयुग की अवधि ( कलियुग से दुगनी ) ==> ८,६४,००० वर्ष
त्रेतायुग की अवधि ( कलियुग से तीन गुनी ) ==> १२,९६,००० वर्ष
सतयुग की अव्धि ( कलियुग से चार गुनी ) ==> १७,२८,००० वर्ष
१ चतुयुगी ( चारो युगो का योग ) ==> ४३,२०,००० वर्ष
१ मन्वन्तर ==> ७१ चतुयगी
अर्थात ( १ मन्वन्तर = ७१ x ४३,२०,००० वर्ष ) ==> ३,०६,७२,००० वर्ष

दो मन्व्न्तर के बीच एक सध्याश होता है जो एक सतयुग के बराबर होता है
सन्ध्या ==> १७,२८,००० वर्ष

१ कल्प = १४ मन्वयन्तर व सन्ध्याश के १५ सतयुग के बराबर का योग
अर्थात( १४ x ३,०६,७२,००० वर्ष ) + ( १५ x १७,२८,००० वर्ष )

एक कल्प ==> ४,३२,००,००,००० वर्ष

( ४ अरब ३२ करोड वर्ष )

यह ब्रह्मा का १ दिन ओर उतनी ही अवधि की रात होती है

१ दिन रात ( ४ अरब ३२ करोड वर्ष २ ) ==> ८,६४,००,००,००० वर्ष
ब्रह्मा का १ वर्ष ==> ३१,१०,४०,००,००,००० ( ८,६४,००,००,००० वर्ष x ३६० ) ( ३१ खरब १० अरब ४० करोड वर्ष )
ब्रह्मा का १०० वर्ष ==> विष्णु का एक निमेष ==> ( ३१ खरब १० अरब ४० करोड वष x १०० ) ==> ३१ नील १० अरब ४० अरब वर्ष
विष्णु के १०० वर्ष ==> रुद्र का १ दिन

रुद्र स्वय कालरुप है ओर अन्नत है,
इसलिये कहा जाता है – काल अन्नतान्नत है

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Sunday, October 21, 2012

विजय दशमी पर्व पर जीवन में उन्नति के लिए उपाय क्या करे

GOOD ARTICLE 
BY SHREE ARVIND SINGH ON FACE BOOK


विजय दशमी पर्व की बहुत बहुत शुभ कामनाऍ............ विजयादशमी अथार्त दशहरा का पर्व इस बार २४ अक्तुबर २०१२, (बुधवार) को...... 

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है, दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है. भगवान श्री राम चन्द्र जी ने इसी दिन रावण का वध किया था. इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है. दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा. ये अभूज मुहूर्त कहलाते है................

कथा : - इस दिन राम ने रावण का वध किया था. रामायण के अनुसार राम तथा सीता जी के वनवास के दौरान रावण, राम की पत्नी सीता का अपहरण कर लंका ले जाता है. तब भगवान श्री राम अपनी पत्नी सीता जी को रावण के बंधन से मुक्त कराने हेतु राम ने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान एवं वानरों की सेना के साथ मिलकर रावण के साथ एक बड़ा युद्ध करते हैं.

युद्ध के दौरान श्री राम जी नौ दिनों तक युद्ध की देवी मां दुर्गा जी की पूजा करते हैं तथा दसवें अर्थात दशमी के दिन रावण का वध करते हैं और सीता जी को बंधन से मुक्त कराते हैं. इसलिए विजयदशमी एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण दिन है. इस दिन रावण, उसके भाई कुम्भकरण और पुत्र मेघनाद के पुतले जगह-जगह में जलाए जाते हैं.

उपाय क्या करे इस दिन ................

१. इस दिन काली गूंजा को गंगा जल और गौ माता के दूध से शुद्ध करके जो भी पास में रखता है, उसके काफी संकट दूर होते है..... ध्यान रखे की मुसीबत के समय इसका रंग अपने आप बदल जाएगा........

२. इस दिन नागकेशर के पौधा का रोपण करे और उसकी देखभाल करे.... जैसे - जैसे पौधा बढेगा आपकी उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होगा.....

३. इसी तरह से बरगद में पेड़ के नीचे जो भी पौधा हो उससे जड़ समेत लेकर घर में लगाये और उसकी देखभाल करे तो भी उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.....

४. इस दिन सूर्यास्त के समय आधा किलो दूध में ९ बूँद शुद्ध शहद की डाल कर (अगर घर बड़ा हो तो १ किलो दूध में १८ बूँद शहद की डाले) पुरे घर में छिडकाव करे. उसके बाद जो दूध बच जाए, वो चौराहे पर रख आये. ऐसा पुरे २१ दिन करना है. घर में कैसी भी नकारात्मक शक्ति होगी वो दूर होगी. सूर्यास्त जिस समय हो, उसके १२ मिनट पहले और अस्त होने के १२ मिनट बाद.... यानी की ये २४ मिनट के अन्दर ही ये उपाय करना है....... 

५. इस दिन यदि किस्मत से कोई हिंजड़ा मिल जाए तो उसे ज़रूर कुछ न कुछ दे और अगर वो आपको बदले में कुछ दे तो उसे संभाल कर अपने पास रख ले, बहुत ही शुभ होगा.......

६. इस दिन लाल रंग से २१०० बार राम लिखे और राम शब्द जिस कागज़ पर लिखा है वहा से सारे काट ले..... इन काटे हुए कागज़ को २१०० आटे की छोटी-छोटी गोलियों में भर कर ऐसी जगह पर जाए जहा पर मछलियाँ हो........ वह पर बैठ कर "ॐ जय श्री राम" कहते हुए, एक-एक करके गोलियों को खिला दे........ संकट दूर......

७. इस दिन किसी भी संकट को दूर करने के लिए, बाबा हनुमान जी की शरण में जाए. इस दिन उपवास रख कर बाबा जी को चोला अर्पित करे (सुबह के समय), गुड - चने का भोग लगाये और संध्या समय बाबा जी को लड्डू का भोग लगाकर, १०८ बार वही बैठ कर श्री हनुमान चालीसा का पाठ करे, ध्यान दे की जब तक पाठ समाप्त ना हो जाए धूप-दीपक जलता रहे. तत्पश्चात कपूर से आरती करके, गलतियों की माफ़ी मांग कर, अपने संकट दूर करने का निवेदन करे और घर वापस आ जाए...................... 

८. इस दिन धार्मिक स्थल में गुप्त दान विशेष रूप से सहायक होगा... जीवन में उन्नति के लिए......

९. इस दिन से शुरू करते हुए, ४३ दिन तक बेसन के लड्डू किसी भी कुत्ते को खिलाना शुरू करे तो घर में बरकत होनी शुरू हो जायेगी..... ध्यान रहे की प्रतिदिन एक ही कुत्ता न हो.... मतलब की.. एक ही कुत्ते को ना दे ये लड्डू........

१०. इस दिन सवा किलो जलेबी का भोग बाबा भैरव नाथ जी को लगाये, ५ तरह की मिठाई साथ में अर्पित करके धूप-दीप करे, फिर उस जलेबी में से थोड़ी सी ले कर किसी भी कुत्ते को खिला दे, ऐसा २१ बुधवार करने से, संकट दूर होने में, मदद बाबा जी के आशीर्वाद से मिलेगी....

११. इस दिन से शुरू करते हुए, भगवान् श्री गणेश जी को एक सुपारी अर्पित करे और एक कटोरी चावल का दान करे, पुरे वर्ष भर तक, कैसी भी नज़र दोष होगी घर पर या फिर कुछ भी अप्राकर्तिक होगा, सब श्री गणेश जी के आशीर्वाद से दूर होगा.....

Friday, October 19, 2012

श्रीसुदर्शन-कवच-----

GOOD ARTICLE 
BY SHREE ASHU BAHUGUNA ON FACEBOOK


श्रीसुदर्शन-कवच-----

‘श्रीसुदर्शन-चक्र’ भगवान् विष्णु का प्रमुख आयुध है, जिसके माहात्म्य की कथाएँ पुराणों में स्थान-स्थान पर दिखाई देती है। ‘मत्स्य-पुराण’ के अनुसार एक दिन दिवाकर भगवान् ने विश्वकर्मा जी से निवेदन किया कि ‘कृपया मेरे प्रखर तेज को कुछ कम कर दें, क्योंकि अत्यधिक उग्र तेज के कारण प्रायः सभी प्राणी सन्तप्त हो जाते हैं।’ विश्वकर्मा जी ने सूर्य को ‘चक्र-भूमि’ पर चढ़ा कर उनका तेज कम कर दिया। उस समय सूर्य से निकले हुए तेज-पुञ्जों को ब्रह्माजी ने एकत्रित कर भगवान् विष्णु के ‘सुदर्शन-चक्र’ के रुप में, भगवान् शिव के ‘त्रिशूल′-रुप में तथा इन्द्र के ‘वज्र’ के रुप में परिणत कर दिया।

‘पद्म-पुराण’ के अनुसार भिन्न-भिन्न देवताओं के तेज से युक्त ‘सुदर्शन-चक्र’ को भगवान् शिव ने श्रीकृष्ण को दिया था। ‘वामन-पुराण’ के अनुसार भी इस कथा की पुष्टि होती है। ‘शिव-पुराण’ के अनुसार ‘खाण्डव-वन’ को जलाने के लिए भगवान् शंकर ने श्रीकृष्ण को ‘सुदर्शन-चक्र’ प्रदान किया था। इसके सम्मुख इन्द्र की शक्ति भी व्यर्थ थी।

‘वामन-पुराण’ के अनुसार दामासुर नामक भयंकर असुर को मारने के लिए भगवान् शंकर ने विष्णु को ‘सुदर्शन-चक्र’ प्रदान किया था। बताया है कि एक बार भगवान् विष्णु ने देवताओं से कहा था कि ‘आप लोगों के पास जो अस्त्र हैं, उनसे असुरों का वध नहीं किया जा सकता। आप सब अपना-अपना तेज दें।’ इस पर सभी देवताओं ने अपना-अपना तेज दिया। सब तेज एकत्र होने पर भगवान् विष्णु ने भी अपना तेज दिया। फिर महादेव शंकर ने इस एकत्रित तेज के द्वारा अत्युत्तम शस्त्र बनाया और उसका नाम ‘सुदर्शन-चक्र’ रखा। भगवान् शिव ने ‘सुदर्शन-चक्र’ को दुष्टों का संहार करने तथा साधुओं की रक्षा करने के लिए विष्णु को प्रदान किया।

‘हरि-भक्ति-विलास’ में लिखा है कि ‘सुदर्शन-चक्र’ बहुत पुज्य है। वैष्णव लोग इसे चिह्न के रुप में धारण करें। ‘गरुड़-पुराण’ में ‘सुदर्शन-चक्र’ का महत्त्व बताया गया है और इसकी पूजा-विधि दी गई है। ‘श्रीमद्-भागवत’ में ‘सुदर्शन-चक्र’ की स्तुति इस प्रकार की गई है- ‘हे सुदर्शन! आपका आकार चक्र की तरह है। आपके किनारे का भाग प्रलय-कालीन अग्नि के समान अत्यन्त तीव्र है। आप भगवान् विष्णु की प्रेरणा से सभी ओर घूमते हैं। जिस प्रकार अग्नि वायु की सहायता से शुष्क तृण को जला डालती है, उसी प्रकार आप हमारी शत्रु-सेना को तत्काल जला दीजिए।’

‘विष्णु-धर्मोत्तर-पुराण’ में ‘सुदर्शन-चक्र’ का वर्णन एक पुरुष के रुप में हुआ है। इसकी दो आँखें तथा बड़ा-सा पेट है। चक्र का यह रुप अनेक अलंकारों से सुसज्जित तथा चामर से युक्त है


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