Wednesday, October 3, 2012

रोग नाश हेतु करे धनतेरस का व्रत एवं पूजा


BY MR. VAGHA RAM PARIHAR ON FACE BOOK

परिहार ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र
मु. पो. आमलारी, वाया- दांतराई
जिला- सिरोही (राज.) 307512



कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को रोग नाश हेतु व्रत किया जाता है। इस दिन आम जन धन तेरस एवं चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित लोग धन्वन्तरी जयंति के रूप में मनाते है। इस दिन धन्वन्तरी की पुजा करते हुए व्रत किया जाता है। इसके लिए सर्वप्रथम सूर्योदय से पूर्व उठकर नहा धोकर पवित्र होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करे। फिर सूर्य देव एवं धन्वन्तरी को प्रणाम करते हुए रोग नाश की प्रार्थना करते हुए संकल्प कर व्रत प्रारंभ करे। इस दिन भगवान धन्वंतरी की कथा का वाचन अथवा श्रवण करे।

देवताओ ने सागर मंथन का महत्व बताकर दानवो को भी अपने साथ मिला दिया। क्योकि अकेले देवताओं मे सागर मंथन करने की सामथ्र्य नही थी । इस पर देव और दानवो ने मिलकर समुद्र मंथन प्रारंभ कर दिया। इस कार्य हेतु अनेक औषधियो को सागर मे डालकर मन्दरांचल को मथानी एवं वासुकि नाग को रस्सी बनाकर सागर मंथन प्रारंभ किया लेकिन मन्दरांचल का कोई आधार नही होने से वह समुद्र में धसने लगा। तब भगवान श्री हरि ने कुर्म रूप धारण कर मन्दरांचल को अपनी पीठ पर धारण कर लिया। एवं स्वयं ने अदृश्य रूप से सागर मंथन मे सहयोग भी किया। इस मंथन से हलाहल,कामधेनु,ऐरावत,उच्चैश्रवा, अश्व,अप्सराएं,कौस्तुभमणि,वारूणी,शंख,कल्पवृक्ष,चंद्रमा,लक्ष्मी जी और कदली वृक्ष प्रकट हो चुके थे। इसके पश्चात अमृत प्राप्ति के लिए पुनः समुद्र मंथन होने लगा और अंत मे हाथ मे अमृत कलश धारण किए भगवान धन्वन्तरी प्रकट हुए। भगवान धन्वन्तरी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन भगवान धन्वन्तरी के निमित व्रत कर पुजा की जाती है।

भगवान धन्वन्तरी कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसीलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा चल पडी जो वर्तमान मे सोना,चांदी एवं अन्य वस्तुओ की खरीद भी की जाती है। उसी प्रकार धन की पुजा अर्चना भी की जाने लगी। इसी कारण इसे धन तेरस के नाम से भी प्रचलित हो गया। भगवान धन्वन्तरी ने जब भगवान विष्णु से कहा कि देवलोक मे मेरा स्थान और भाग भी निश्चित कर दे। इस पर भगवान विष्णु ने कहा कि देवो के बाद आने के कारण तुम ईश्वर नही हो। परंतु तुम्हे अगले जन्म मे सिद्धिया प्राप्त होकर तुम लोक मे प्रसिद्ध होंगे उसी शरीर से तुम्हे देवत्व प्राप्त होगा। फिर इन्द्र के अनुरोध पर देववैद्य का पद स्वीकार किया। फिर कुछ समय पश्चात जब पृथ्वी पर अनेक रोग फैलने लगे। तब इन्द्र की प्रार्थना पर भगवान दिवोदास के रूप मे प्रकट हुए। हरिवंश पुराण के अनुसार काशिराज धन्व की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उनके पुत्र रूप मे जन्म लेकर धन्वंतरी नाम धारण किया। इस प्रकार इस दिन भगवान धन्वन्तरी का जन्म हुआ।
धनतेरस के व्रत मे एक बार फलाहार कर शाम को पुजन कर निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए। जिससे आपका रोग नष्ट हो जाए।

1 ओम धन्वंतरये नमः
2 ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरायैः ,
अमृत कलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोग निवारणाय।
त्रिलोकपथाय त्रि लोक नाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप ,
श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषध चक्र नारायणाय नमः।।
3 धनतेरस के दिन संध्याकाल मे दक्षिण की तरफ मुख रखते हुए यम से प्रार्थना कर दीपक जलाए तो अकाल मृत्यु का भय नही रहता है।
4 धनतेरस के दिन रोगी व्यक्ति के सिर से लेकर पांव तक के नाप का काला धागा ले। इसे सुखे जटा नारियल पर लपेटे। नारियल को हरे कपडे मे बांधकर जल प्रवाह करे। जल प्रवाह करते समय रोगी व्यक्ति के नाम का गौत्र सहित उच्चारण करते हुए उसके शीघ्र सवस्थ होने की कामना करे तो रोगी व्यक्ति के स्वास्थ्य मे सुधार होने लगता है।
आप भी यदि किसी रोग से ग्रसित है या परिवार मे कोई रोग ग्रस्त है तो इस दिन व्रत रखकर उपरोक्त उपाय करने से अवश्य ही स्वास्थ्य लाभ होता है।

परिहार ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र
मु. पो. आमलारी, वाया- दांतराई
जिला- सिरोही (राज.) 307512
मो. 9001742766,9001846274,02972-276626
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Monday, October 1, 2012

श्राद्ध में इन 10 चीजों का दान देता है तरक्की व सफलता


FROM DAINIK BHASKAR DOT COM


हिन्दू धर्म में दान को धर्म पालन का अहम और जरूरी अंग माना गया है। खासतौर पर पितरों की प्रसन्नता के लिए श्राद्धपक्ष में किए जाने वाले सोलह श्राद्ध के श्राद्धकर्म के साथ किए जाने वाले दान न केवल पितृदोष खत्म करते हैं बल्कि घर-परिवार की तरक्की व खुशहाली में आ रही सारी रुकावटों को दूर करते हैं। पितृपक्ष में खासतौर पर दस दान महादान माने गए हैं। तस्वीरों के साथ जानिए ये दान और उनके फल - 

  1. तिल का दान - श्राद्ध के हर कर्म में तिल का महत्व है। इसी तरह श्राद्ध में दान की दृष्टि से काले तिलों का दान संकट, विपदाओं से रक्षा करता है।
  2. घी का दान - श्राद्ध में गाय के घी का एक पात्र में रखकर दान परिवार के लिए शुभ और मंगलकारी माना जाता है।
  3. सोने का दान - सोने का दान कलह का नाश करता है। किंतु अगर सोने का दान संभव न हो तो सोने के दान के निमित्त यथाशक्ति धन दान भी कर सकते हैं।
  4. अनाज का दान - अन्नदान में गेंहू, चावल का दान करना चाहिए। इनके अभाव में कोई दूसरा अनाज भी दान किया जा सकता है। यह दान संकल्प सहित करने पर मनोवांछित फल देता है।
  5. वस्त्रों का दान - इस दान में धोती और दुपट्टा सहित दो वस्त्रों के दान का महत्व है। यह वस्त्र नए और स्वच्छ होना चाहिए।
  6. चाँदी का दान - पितरों के आशीर्वाद और संतुष्टि के लिए चाँदी का दान बहुत प्रभावकारी माना गया है।
  7. भूमि दान - अगर आप आर्थिक रुप से संपन्न है तो श्राद्ध पक्ष में किसी कमजोर या गरीब व्यक्ति को भूमि का दान आपको संपत्ति और संतति लाभ देता है। किंतु अगर यह संभव न हो तो भूमि के स्थान पर मिट्टी के कुछ ढेले दान करने के लिए थाली में रखकर किसी ब्राह्मण को दान कर सकते हैं।
  8. गुड़ का दान - गुड़ का दान पूर्वजों के आशीर्वाद से कलह और दरिद्रता का नाश कर धन और सुख देने वाला माना गया है।
  9. गाय का दान - धार्मिक दृष्टि से गाय का दान सभी दानों में श्रेष्ठ माना जाता है। लेकिन श्राद्ध पक्ष में किया गया गाय का दान हर सुख और ऐश्वर्य देने वाला माना गया है।
  10. नमक का दान - पितरों की प्रसन्नता के लिए नमक का दान बहुत महत्व रखता है। इस दान के पहले यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन कराएं और उसके बाद दान करते समय यह श्लोक बोलकर भगवान विष्णु से श्राद्धकर्म की शुभ फल की प्रार्थना करें - यस्य स्मृत्या च नामोक्त्या तपोयज्ञक्रियादिषु। न्यूनं सम्पूर्णतां याति सद्यो वन्दे तमच्युतम्।।

सोमवार को शिव पूजा से पितृदोष व ग्रह दोष भी दूर हो जाते हैं।

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http://religion.bhaskar.com/article/ups-these-steps-of-lord-shiv-worship-in-shradhpaskh-quicly-fulfill-desire-3859460-PHO.html?seq=8




शिव पुराण में शिव चरित्र में समाए निराले गुण, शक्तियां और महिमा उजागर हैं। इसलिए शिव का मात्र नाम भी जीवन को संवारने का महामंत्र माना गया है। शिव के कल्याणकारी होने से उनका नाम भी भक्त के मन को परोपकार के भाव की प्रेरणा से भर देता है।

यही नहीं, शिव के इस चरित्र में शिव परिवार भी शामिल है। गृहस्थ जीवन के लिए शिव व उनका परिवार विपरीत हालात से तालमेल बैठाकर हर मुश्किलों से पार पाने का संदेश देता है। शिव परिवार के हर सदस्य यानी मां पार्वती, गणेश व कार्तिक की भक्ति संकटमोचक व शक्ति संपन्नता देने वाली ही है।

यही वजह है कि शिव उपासना का विशेष दिन सोमवार, व्यर्थ परेशानियों से छुटकारे व कामनासिद्धि के लिए विशेष महत्व रखता है। खासतौर पर श्राद्धपक्ष के साथ योग बनाने वाला सोमवार। चूंकि श्राद्धपक्ष भी परिवार की खुशहाली के लिए ही मिलजुलकर पूर्वजों का स्मरण का मौका होता है। इसमें सोमवार को शिव पूजा से पितृदोष व ग्रह दोष भी दूर हो जाते हैं।

श्राद्धपक्ष व सोमवार के संयोग में शास्त्रों में बताए शिव पूजा के कुछ सरल उपाय व मंत्र ऐसी सारी इच्छाओं को पूरा कर परेशानियों को भी दूर कर देते हैं। तस्वीरों पर क्लिक कर जानिए ये आसान पूजा के आसान तरीके व मंत्र- 



  1. पारिवारिक अशांति व तनाव दूर करने के लिए गाय के दूध से शिव अभिषेक बहुत ही मंगलकारी है।
  2. लंबी बीमारी या लाइलाज बीमारी से तंग हैं तो पंचमुखी शिवलिंग पर तीर्थ का जल अर्पित करने से रोगमुक्त होंगे।
  3. सोमवार को शिवलिंग में आंकड़े का फूल या धतूरा चढ़ाने से पारिवारिक, नौकरी या अदालती विवादों से छुटकारा या मनचाहे नतीजे मिलते हैं।
  4. आयुर्वेद में भांग के औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पति है। प्रकृति रूप शिव को भी भांग पंसद होने से भी प्रकृति के लिए प्रेम रखने और निरोगी रहने का सबक जुड़ा है। इसलिए दूध में भांग मिलाकर मानसिक परेशानियों व रोगों से पीछा छुड़ाएं।काम, आजीविका, नौकरी में तरक्की या अच्छे रोजगार की इच्छा है तो शिवलिंग पर शहद की धारा चढ़ाएं।
  5. इन सब उपायों में से कोई भी न कर सके तो कम से कम सोमवार शिव को पावन जल और 108 बिल्वपत्र ही अर्पित कर दें। इससे जीवन में हो रही हर उथल-पुथल थम जाएगी। यह उपाय करते वक्त खासतौर पर ये मंत्र बोलना या वक्त होने पर रुद्राक्ष की माला से जप करना न भूलें - ऊँ सद्योजाताय नम:। ऊँ वामदेवाय नम:। ऊँ अघोराय नम:। ऊँ तत्पुरुषाय नम:ऊँ ईशानाय नम:।

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Saturday, September 29, 2012

हनुमान जी की पूजा से शनि होते हैं अनुकूल


BY ASTRO-SHINE ON FACE BOOK

PHOTO BY SHREEPAD GEMS DOT COM



1. मान-सम्मान की प्राप्ति हेतु -

यदि संपूर्ण प्रयासों के बावजूद भी मान-सम्मान नहीं मिल रहा है, समाज में आप अपनी बात नहीं कह पा रहे हैं। करना जाते हैं अच्छा और बुरा हो जाता है। लोगों ने आपसे कहा है कि निजकृत कर्मों की वजह से आपका शनि अनुकूल नहीं है तो मंगलवार के दिन यह पूजा प्रारंभ करें और लगातार 40 दिन क
रें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत गीले कपड़ों में 9, 11 या 21 श्वेतार्क के पुष्प हनुमान जी के श्रीचरणों में अर्पित करें। अवश्य लाभ मिलेगा। हर रोज ऊँ हं पवननदनाय स्वाहा मंत्र की 5 माला का जाप करें।
2. चल-अचल संपत्ति हेतु-

लाख कोशिशें के बावजूद भी आप भूमि-भवन और वाहन की प्राप्ति नहीं कर पा रहे हैं। आपके पास धन है उसके बाद बावजूद भी आप संपत्ति नहीं खरीद पा रहे हो और किसी ने आपसे कहा है कि जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह पूजा आपको लाभ देगी। किसी भी मंगलवार को यह पूजा प्रारंभ करें और लगातार 21 दिन तक करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत भगवान सूर्य को जल देने के बाद लाल कपड़े में श्रद्घानुसार मसूर की दाल बांधकर सुहागिन कर्मचारी महिला को दान में दे। हर रोज 9 माला ऊँ राम भक्ताय नम: इस मंत्र का जाप करें।

3. पारिवारिक सुख हेतु-

संपूर्ण मेहनत और परिश्रम के बावजूद भी पारिवारिक सदस्य एक साथ नहीं रह पा रहे हो, घर में हमेशा कलाह रहता हो, बाहर सब कुछ ठीक है और घर में प्रवेश करते ही आपस में टकराव हो जाता है और लोगों ने आपको भयभीत किया है कि जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह पूजा आपको लाभ देगी। किसी भी मंगलवार के दिन यह पूजा प्रारंभ करें। लगातार 43 दिन तक करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नान करने वाले जल में हल्दी की गांठ डालकर स्नान करें। ततपश्चात गीले वस्त्रों में भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं। ऊँ कपिराजाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें।

4. वाहन प्राप्ति हेतु-

संपूर्ण आर्थिक संपन्नता के बावजूद भी वाहन प्राप्ति में तकलीफ आ रही हो, लोगों ने आपको डराया हो कि जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह पूजा आपके लिए रामबाण रहेगी। किसी भी मंगलवार के दिन यह पूजा प्रारंभ करें। लगातार 40 दिन करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत 400 ग्राम साबूत मसूर गंगाजल से धोकर अपने ऊपर से 7 बार उसारकर बहते पानी में प्रवाह करें। साथ ही हनुमान जी के ऊँ नमो भगवते आन्ञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा। मंत्र 3 माला हर रोज करें।

5. संतान सुख हेतु

प्रयासों के बावजूद भी प्रयासों भी संतान आपके हाथ से निकल रही हो, आपकी बात नहीं मानती हो, संतान को सफलता नहीं मिल रही हो, संतान की शादी नहीं हो रही हो, संतान गलत राह पर चल रही हो तो हनुमान जी का यह उपाय आपके लिए राम बाण रहेगा। यह उपाय आप मंगलवार को प्रारंभ करें। लगातार 40 दिन करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत हनुमान जी की मूर्ति जो आशीर्वाद देते हुए नजर आती हो उसे 108 गुलाब के पुष्पों की माला अर्पित करें। वहीं बैठकर ऊँ वायु पुत्राय नम: मंत्र का जाप करें।

6. कोर्ट-कचहरी के मसलें निवारण हेतु-

ईमानदारी, मेहनत, परिश्रम और सच्चाई से काम करने के बावजूद भी कोई न कोई अड़चनें आपको परेशान करती हो और किसी ने आपसे कहा है कि जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह आराधना कष्ट मिटायेगी। मंगलवार के दिन सूर्योदय से पूर्व नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत हनुमान जी के श्रीचरणों में ऊँ अग्निगर्भाय नम: मंत्र का जाप करते हुए 108 चुटकी सिंदूर अर्पित करें। अवश्य लाभ मिलेगा। ऐसा नियमित 40 दिन करें।
मंगलवार के दिन कन्याओं को श्रद्घानुसार चावल देना भी शुभ रहेगा।
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7.दांपत्य सुख हेतु-

वैवाहिक रिश्तों में बिना मतलब कड़वाहट रहती हो, बात-बात पर पति-पत्नी में झगड़ा हो जाता हो, और किसी ने आपसे कहा है कि आप दोनों की जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह पूजा आपको अवश्य लाभ देगी। हर मंगलवार के दिन श्रद्घापूर्वक पंचोपचार पूजन करने के उपरांत मिट्टी के पात्र में शहद भरकर हनुमान जी के मंदिर में अर्पित करें। वहीं बैठकर शुद्घ लाल आसन पर ऊँ श्री हनुमते नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। ऐसा 21 मंगलवार करें। अवश्य लाभ मिलेगा।

8. दुर्घटना निवारण हेतु-

यदि आपके साथ में बिना कारण ही दुर्घटना घट जाती है, बार-बार आपकी गाड़ी का एक्सीडेंट होता हो, अनावश्यक भय बना रहता हो, और किसी ने आपसे कहा है कि आपकी जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह प्रयोग आपको अवश्य लाभ देगा। मंगलवार के दिन यह पूजा प्रारंभ करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत हनुमान जी का ध्यान करते हुए अपने पूजा स्थान में चमेली के तेल का दीपक जलाएं। श्रद्घापूर्वक ऊँ हं हनमते रुद्रआत्मकाय हुं फट्। मंत्र का जाप करें। ततपश्चात 108 चमेली के पुष्प हनुमान जी के श्रीचरणों में अर्पित करें। ऐसा 11 मंगलवार करें।

9. शत्रु कष्ट निवारण हेतु-

बिना वजह दुश्मनों का डर सताता हो, हमेशा मन भयभीत रहता हो, और लोगों ने आपको भयभीत किया हो कि कि आपकी जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह पूजा करने से दुश्मन आपका बुरा नहीं कर पाएगा। किसी भी मंगलवार के दिन यह पूजा प्रारंभ करें। प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत माता-पिता के चरण स्पर्श करें। पारद हनुमत प्रतिमा के सामने लाल हकीक की माला पर हर रोज ऊँ नमो हनुमते रुदावताराय सर्व शत्रु संहाराणाय सर्व रोग हराय, सर्व वशीकरणाय राम दूताय स्वाहा मंत्र का जाप करने से अवश्य लाभ मिलेगा।

10. कार्य बाधा निवारण हेतु-

चलते काम में अचानक बाधा आती हो, चलता-चलता काम अचानक रुक जाता हो, व्यवसाय में बिना वजह परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो और लोगों ने आपसे कहा है कि आपकी जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की इस पूजा से संपूर्ण कष्टों का निवारण होता है। मंगलवार के दिन पूजा प्रारंभ करें। लगातार 40 दिन करें। हर रोज नित्यक्रम से निवृत्त हो स्नानोपरांत दक्षिणावर्ती हनुमान जी की मूर्ति के सामने तेल का दीपक जलाएं। ततपश्चात गुड़ के चूरमे का भोग लगाएं। ऊँ नम: हरीमरकटमरकटाय स्वाहा इस मंत्र का 3 माला जाप करें। संपूर्ण कष्टों से छुटकारा मिलेगा।

11. कर्जें से मुक्ति हेतु-

लाख प्रयासों के बावजूद भी कर्जें से मुक्ति नहीं मिल पा रही हो और किसी ने आपसे कहा है कि आपकी जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल नहीं है, शनिदेव की वजह से कष्ट आ रहे हैं तो हनुमान जी की इस पूजा का करने से संपूर्ण कष्टों से छुटकारा मिलेगा। किसी भी मंगलवार के दिन लाल चंदन की हनुमान जी की प्रतिमा बनाकर, गंगाजल से पवित्र कर श्रद्घापूर्वक अपने पूजा स्थान में लाल वस्त्र पर स्थापित करें। हर रोज देसी घी का दीपक जलाकर 21 दिन तक 11 माला ऊँ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा। मंत्र का जाप करें। जाप के उपरांत 9 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को लाल वस्त्र का दान दें। संपूर्ण कष्टों से छुटकारा मिलेगा।

12. कारोबार में लाभ हेतु-

संपूर्ण प्रयासों के बावजूद भी कारोबार में लाभ नहीं मिल रहा हो, सारे प्रयास विफल हो रहे हो तो मंगलवार के दिन हनुमान जी की यह आराधना प्रारंभ करें। और लगातार 40 दिन करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत सूर्योदय से पूर्व हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें। ततपश्चात शुद्घ चंदन का धूप जलाकर, घी का दीपक प्रज्जवलित कर एक पाठ सुंदरकांड का करें। पूजा के उपरांत मीठा भोजन गरीब व जरूरतमंद कन्याओं को कराएं।

13. रोग मुक्ति हेतु-

यदि प्रयासों के बावजूद भी रोगों से पीछा नहीं छुट रहा हो, डॉक्टर को बीमारी समझ में नहीं आ रही हो, द वा काम नहीं कर रही हो और किसी ने आपसे कहा है कि आपकी जन्मकुंडली में निजकृत कर्मों की वजह से शनि अुनकूल फल प्रदान नहीं कर रहा है तो हनुमान जी की यह पूजा आपको अवश्य लाभ देगी। हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत मंगलवार के दिन हनुमान जी का ध्यान करते हुए पंचोपचार का पूजन करें। लाल कपड़े 700 ग्राम रेवडिय़ां बांधकर पोटली बनाकर अपने पूजा स्थान में रख दें। घी का दीपक जलाकर संकटमोचन हनुमानष्टक के 11 पाठ करें। ततपश्चात यह पोटली अपने ऊपर से 7 बार उसार करके बहते पानी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। पूजा के उपरांत गरीब बच्चों को मीठे परांठे खिलाना भी लाभयदायक रहेगा।

Tuesday, September 18, 2012

नियमों के अनुसार भगवान श्रीगणेश की स्थापना व पूजन




http://religion.bhaskar.com/article/vastu--keep-these-10-special-precautions-in-the-establishment-and-worship-to-lor-3800522.html

FROM BHASKAR ONLINE -

19 सितंबर, बुधवार को गणेश चतुर्थी है। इस दिन घर-घर भगवान श्रीगणेश की स्थापना की जाती है। हमारे धर्म ग्रंथों में इस संबंध में कई नियम बताए गए हैं। यदि इन नियमों के अनुसार भगवान श्रीगणेश की स्थापना व पूजन प्रतिदिन करें व कुछ सावधानियों को ध्यान रखें तो श्रीगणेश पूजन का मनोवांछित फल मिलता है। यह नियम व सावधानियां इस प्रकार हैं-

  •  जिस स्थान पर भगवान श्रीगणेश की स्थापना करें उस स्थान को प्रतिदिन साफ करें वहां कचरा इत्यादि न जमा हो पाए।
  •  भगवान श्रीगणेश की रोज सुबह- शाम आरती करें व दीपक लगाएं। भोग भी दोनों समय लगाएं।
  •  धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीगणेश को तुलसी न चढ़ाएं। इससे दोष लगता है। भगवान श्रीगणेश को दूर्वा व ताजे फूल चढ़ाएं तो बेहतर रहेगा।
  •  श्रीगणेश की स्थापना ईशाण कोण में करें। स्थापना इस प्रकार करें कि श्रीगणेश की मूर्ति का मुख पश्चिम की ओर रहे।
  •  स्थापना स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या वजनी चीज न रखें।
  • स्थापना स्थल पर पवित्रता का ध्यान रखें जैसे- चप्पल पहनकर कोई स्थापना स्थल तक न जाए, चमड़े का बेल्ट या पर्स रखकर कोई पूजा न करें
  •  स्थापना के बाद श्रीगणेश की प्रतिमा को इधर-उधर न रखें यानी हिलाएं नहीं।
  • स्थापना स्थल के समीप बैठकर किसी धर्म ग्रंथ का पाठ रोज करेंगे तो शुभ फल मिलेगा।


चार साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि जब गणेश चतुर्थी का पर्व बुधवार को आ रहा है। धर्म ग्रंथों में बुधवार को भगवान गणेश का दिन माना गया है और इस बार 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत बुधवार से ही हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गणेश चतुर्थी और बुधवार का ये शुभ संयोग सबके लिए सुख-समृद्धिकारक रहेगा। 

इस बार 19 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत होगी और 29 सितंबर तक उत्सव की धूम रहेगी। इस वर्ष भादौ का अधिकमास होने से गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे एक महीने देरी से आ रहा है। 

वर्ष 2008 में गणेश चतुर्थी बुधवार को आई थी। अब 2012 में यह संयोग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसके बाद 2022 में यानी 10 साल बाद बुधवार और गणेश चतुर्थी का संयोग बनेगा।

शुभ फलदायी होगी चतुर्थी

गणेश स्थापना के लिए बुधवार का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जा रहा है। गणेशजी रिद्धि-सिद्धि के दाता होकर सबका मंगल करने वाले हैं। ज्योतिषियों के अनुसार ये संयोग शुभ फलदायी होगा।

भद्रा में कर सकेंगे स्थापना

- चतुर्थी 18 सितंबर को रात 11.57 से 19 सितंबर की रात 9.15 बजे तक रहेगी।

- इसी दिन रात 9.27 से 19 सितंबर की शाम 7.29 बजे तक स्वाति नक्षत्र रहेगा।

- भद्रा नक्षत्र 19 सितंबर की सुबह 10.35 बजे से रात 9.15 बजे तक रहेगा।

- लेकिन भद्रा नक्षत्र का प्रभाव गणेश स्थापना पर नहीं पड़ता है। पूरे दिन शुभ मुहूर्त में गणेश स्थापना की जा सकेगी।